माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का अनावरण, बिलासपुर की साहित्यिक विरासत को मिली नई पहचान

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय जेल के सामने किया प्रतिमा का अनावरण, कहा– राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण की प्रेरणा देता है कवि का जीवन

बिलासपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रख्यात साहित्यकार एवं राष्ट्रकवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की स्मृतियों को संजोने की दिशा में बिलासपुर नगर निगम ने महत्वपूर्ण पहल की है। सोमवार, 2 नवंबर को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बिलासपुर केंद्रीय जेल के सामने स्थापित पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस पहल से शहर की ऐतिहासिक, साहित्यिक और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी विरासत को एक नई पहचान मिली है।

प्रतिमा अनावरण समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना से ओतप्रोत रहा है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से देशवासियों में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और साहित्य को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के लिए यह गौरव का विषय है कि इसी केंद्रीय जेल में रहते हुए उन्होंने कालजयी कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ की रचना की थी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं होतीं, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम होती हैं। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा युवाओं को देश और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा राष्ट्रहित में समर्पण की भावना अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

बिलासपुर केंद्रीय जेल से जुड़ा है ऐतिहासिक संबंध

‘एक भारतीय आत्मा’ के नाम से विख्यात पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का बिलासपुर केंद्रीय जेल से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन ने उन्हें 5 जुलाई 1921 से 1 मार्च 1922 तक बिलासपुर केंद्रीय जेल की बैरक क्रमांक 9 में कैदी संख्या 1527 के रूप में निरुद्ध रखा था।

कारावास के कठिन दौर में भी उनकी राष्ट्रभक्ति और साहित्यिक चेतना कमजोर नहीं हुई। इसी जेल में 18 फरवरी 1922 को उन्होंने अपनी अमर रचना ‘पुष्प की अभिलाषा’ लिखी थी। मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की भावना व्यक्त करने वाली यह कविता आज भी देशभक्ति और राष्ट्रसमर्पण का संदेश देती है।

बैरक क्रमांक 9 को स्मारक के रूप में सहेजा गया

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की ऐतिहासिक स्मृतियों को सुरक्षित रखने के लिए बिलासपुर केंद्रीय जेल की बैरक क्रमांक 9 को स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है। अब जेल के सामने उनकी प्रतिमा स्थापित होने से इस ऐतिहासिक स्थल को एक और महत्वपूर्ण पहचान मिली है। नगर निगम बिलासपुर की इस पहल को शहर की साहित्यिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में महापौर श्रीमती पूजा विधानी, नगर निगम सभापति विनोद सोनी एवं जिला अध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा अब बिलासपुर आने वाली पीढ़ियों को उस ऐतिहासिक दौर की याद दिलाएगी, जब देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले साहित्यकारों ने अपनी लेखनी को भी स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त हथियार बनाया था।

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