मशरूम की खेती से आत्मनिर्भरता की राह पर गीधा की महिलाएं, 20 से 25 किलो तक उत्पादन

mushroom farming women’s success story

राधा-कृष्ण स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपनाया नवाचार, मशरूम उत्पादन बना अतिरिक्त आय का जरिया

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मुंगेली, 1 october 2026। जिले के ग्राम गीधा की राधा-कृष्ण स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मशरूम उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पारंपरिक आजीविका के साथ अतिरिक्त आय के साधन के रूप में शुरू की गई मशरूम की खेती अब समूह की महिलाओं के लिए आर्थिक गतिविधि का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती रीना निषाद ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को एकजुट होकर काम करने और नए आजीविका साधन अपनाने का अवसर मिला। इसी क्रम में समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन शुरू किया। नियमित मेहनत और देखरेख के परिणामस्वरूप एक उत्पादन चक्र में लगभग 20 से 25 किलोग्राम तक मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है।

तैयार मशरूम की बिक्री से समूह की महिलाओं को आमदनी प्राप्त हो रही है। इससे महिलाओं में अपने स्तर पर व्यवसाय करने और आर्थिक रूप से सक्रिय होने का आत्मविश्वास बढ़ा है। समूह की महिलाएं मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया में मिलकर भागीदारी करती हैं और उत्पादन की देखरेख से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री तक की जिम्मेदारियों में सहयोग करती हैं।

कम स्थान में विकसित किया आजीविका का नया विकल्प

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मशरूम उत्पादन की खास बात यह है कि इसे कम स्थान में भी किया जा सकता है। राधा-कृष्ण स्व-सहायता समूह ने इसी संभावना को आजीविका के नए विकल्प के रूप में अपनाया है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी सहयोग मिल रहा है।

रीना निषाद ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं में अपने पैरों पर खड़े होने और कुछ नया करने का उत्साह बढ़ा है। समूह की एकजुटता, नियमित मेहनत और नए आजीविका साधनों को अपनाने की सोच से महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खुल रही है।

मशरूम उत्पादन के माध्यम से समूह की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का एक उदाहरण बन रही है।

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