DGP के दरबार में पहुंचा पत्रकारों और एक्टिविस्टों को निशाना बनाने का मामला, सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांग

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रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का मामला अब पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर पहुंच गया है। वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और प्रभावमुक्त जांच कराने के साथ ही प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरगुजा क्षेत्र में जनहित के मुद्दे उठाने वाले पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के खिलाफ सोशल मीडिया पर चरित्र-हनन, व्यक्तिगत हमलों और धार्मिक रंग देकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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अकील अहमद अंसारी सहित कई नामों का उल्लेख

शिकायत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अकील अहमद अंसारी, वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार जायसवाल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो सहित अन्य पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन लोगों ने सरगुजा में गरीबों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमि संबंधी मामलों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर उठाया। इसी दौरान कथित रूप से उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर निजी जीवन से जुड़े पुराने मामलों को दोबारा सार्वजनिक किया गया।

17 साल पुराने मामले को दोबारा उछालने का आरोप

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि भाजपा कार्यकर्ता बताए गए धीरज सिंह और गौतम सिंह चौहान ने अकील अहमद अंसारी के पुराने निजी मामले को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, जबकि शिकायतकर्ताओं के अनुसार वह मामला वर्ष 2015 में उच्च न्यायालय बिलासपुर में समाप्त हो चुका था।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस मामले को धार्मिक रंग देकर प्रसारित किया गया, जिससे सामाजिक तनाव और व्यक्तिगत सुरक्षा पर खतरे की आशंका उत्पन्न हुई। इन दावों की वास्तविकता की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांग बनी सबसे अहम

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सोशल मीडिया गतिविधियों की वैज्ञानिक जांच की मांग है। शिकायतकर्ताओं ने पोस्टिंग टाइमलाइन, टैगिंग, शेयरिंग पैटर्न, कमेंट और संबंधित अकाउंट्स के मेटाडेटा की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

जांच में यह पता लगाने की मांग की गई है कि—

  • मूल पोस्ट किसने तैयार की?
  • सबसे पहले किस अकाउंट से प्रकाशित हुई?
  • किन-किन अकाउंट्स से साझा की गई?
  • किन प्रभावशाली लोगों को टैग किया गया?
  • क्या एक जैसा कंटेंट समन्वित तरीके से प्रसारित हुआ?

राजनीतिक संरक्षण के भी लगाए आरोप

शिकायत में भाजपा जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और CAIT के प्रदेश उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी की सोशल मीडिया गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित पोस्टों पर उनकी ओर से लाइक, कमेंट या टैग किए जाने जैसी गतिविधियां दिखाई दीं।

हालांकि शिकायत में यह भी माना गया है कि केवल किसी पोस्ट को लाइक या कमेंट करना अपने आप में किसी आपराधिक षड्यंत्र का प्रमाण नहीं है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है।

अनुपम वस्त्रालय प्रकरण का भी दिया गया हवाला

ज्ञापन में अनुपम वस्त्रालय प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में पहले भी सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ ने कथित चरित्र-हनन और जातिगत टिप्पणियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी तथा डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

इसी आधार पर वर्तमान शिकायतकर्ता पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक व्यापक पैटर्न के रूप में जांचने की मांग कर रहे हैं।

DGP से की गई पांच प्रमुख मांगें

ज्ञापन में पुलिस महानिदेशक के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं—

  • अकील अहमद अंसारी और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • आरोपित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक होने पर BNS और साइबर कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।
  • सोशल मीडिया पोस्ट, शेयर, टैग, कमेंट और मेटाडेटा की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
  • कानून के अनुरूप आपत्तिजनक सामग्री पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
  • पूरे मामले की जांच CID अथवा स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए।

पत्रकार संगठनों ने उठाया बड़ा सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी पत्रकार या एक्टिविस्ट की रिपोर्टिंग पर आपत्ति है तो उसका जवाब तथ्य, दस्तावेज और कानून के माध्यम से दिया जाना चाहिए, न कि निजी जीवन को सार्वजनिक कर चरित्र-हनन के जरिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर सोशल मीडिया अभियान चलाने के आरोप लगाए गए हैं, उनकी प्रतिक्रिया और डिजिटल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है।

अब DGP कार्यालय की कार्रवाई पर नजर

मामला अब पुलिस जांच की कसौटी पर है। यदि जांच में केवल आरोप-प्रत्यारोप सामने आते हैं तो तथ्य स्पष्ट होंगे, और यदि संगठित साइबर उत्पीड़न, धार्मिक वैमनस्य फैलाने या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञापन पर डी.पी. गोस्वामी (नया इंडिया), विद्यानंद ठाकुर (प्रधान संपादक, आज का दिन), शैलेश शर्मा, पारितोष शर्मा, दिव्या शर्मा गोस्वामी (प्रधान संपादक, डेमोक्रेसी प्रतिबिंब) सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने हस्ताक्षर कर विरोध दर्ज कराया है।

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