मिशन संचालक का आदेश भी कूड़ेदान में?

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बिल्हा की पुरानी वित्तीय अनियमितता पर कार्रवाई का इंतजार, CMHO कार्यालय की भूमिका पर उठे सवाल

दस्तावेज बोलते हैं… सवाल अभी बाकी हैं!

बिलासपुर/बिल्हा। वर्ष 2014 से 2016 के दौरान बिल्हा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं जीवनदीप समितियों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला वर्षों बाद एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ता रविन्द्र तिवारी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन BMO एवं BPM/RMA अनिल गढ़ेवाल की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच भी की गई थी और जांच रिपोर्ट एवं संबंधित दस्तावेजों को आगे की कार्रवाई के लिए CMHO कार्यालय द्वारा 27 मई 2019 को उच्च अधिकारियों को भेजा गया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जांच के बाद हुई कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या रहा?

🔴 BOX-1 | जांच में क्या सामने आया?

शिकायतकर्ता के अनुसार, CMHO बिलासपुर द्वारा गठित विभागीय जांच समिति ने तत्कालीन BMO एवं BPM/RMA अनिल गढ़ेवाल से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की थी।

दावा है कि जांच रिपोर्ट एवं संबंधित दस्तावेजों को आगे की कार्रवाई के लिए CMHO कार्यालय द्वारा 27 मई 2019 को संबंधित उच्च अधिकारियों को भेजा गया था।

यानी मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं था, बल्कि विभागीय जांच भी हुई थी। अब सवाल यह है कि जांच के निष्कर्षों के बाद विभाग ने क्या कार्रवाई की?

🔴 BOX-2 | मिशन संचालक के आदेश के बाद क्या हुआ?

शिकायतकर्ता ने 18 जून 2021 के मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पत्र का हवाला दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच में दोषी पाए गए BPM एवं RMA संविदा कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार CMHO को होने के कारण कार्रवाई कर मिशन संचालक कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे।

लेकिन इसके बाद स्थिति क्या रही, यह स्पष्ट नहीं है।

सवाल हैं—

  • यदि कार्रवाई हुई तो उसका आदेश कहां है?
  • यदि वसूली की गई तो उसकी रसीद या जमा राशि का रिकॉर्ड कहां है?
  • यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है?

🔴 BOX-3 | करीब ₹55 हजार की वसूली का सवाल

शिकायतकर्ता के अनुसार, PHC बेलतरा के JDS खाते में करीब ₹55 हजार की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था।

शिकायतकर्ता का दावा है कि अनिल गढ़ेवाल JDS बेलतरा के विधिवत सदस्य नहीं थे और न ही संबंधित बिल-वाउचर में स्वीकृति अथवा अस्वीकृति का अधिकार रखते थे। इसके बावजूद करीब ₹55 हजार के बिल-वाउचर पर उनके हस्ताक्षर पाए जाने का उल्लेख जांच समिति की रिपोर्ट में किया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच समिति ने इन बिलों की राशि को अनिल गढ़ेवाल, BPM से वसूली योग्य माना था। इसी आधार पर मिशन संचालक द्वारा CMHO को पत्र जारी कर संबंधित राशि की वसूली अनिल गढ़ेवाल के वेतन से कर JDS खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि CMHO द्वारा वसूली नहीं किए जाने के बाद मिशन संचालक ने वर्ष 2024 में पुनः वसूली के निर्देश दिए।

इसके बाद CMHO द्वारा कथित रूप से BMO बिल्हा को वसूली के लिए पत्र भेजा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, BMO बिल्हा ने जवाब में स्पष्ट किया कि अनिल गढ़ेवाल का वेतन CMHO के हस्ताक्षर से जारी होता है, इसलिए संबंधित राशि की वसूली CMHO के माध्यम से किया जाना संभव होगा।

शिकायतकर्ता का कहना है कि CMHO कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए दोनों पत्र इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।

अब मुख्य सवाल यही है कि करीब ₹55 हजार की कथित राशि की वसूली आखिर हुई या नहीं?

⚠️ कार्रवाई के सवाल के बीच वेतनवृद्धि पर भी विवाद

इसी प्रकरण में शिकायतकर्ता ने CMHO कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर एक और सवाल उठाया है।

आरोप है कि छह नियमित स्वास्थ्य कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्धि के लाभ से वंचित किया गया, जबकि दूसरी ओर पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले में कार्रवाई एवं कथित राशि की वसूली की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सवाल यह नहीं कि किसे बचाया गया या किसके खिलाफ कार्रवाई हुई। सवाल यह है कि क्या नियम सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू किए जा रहे हैं?

📌 दस्तावेजों से उठते 8 बड़े सवाल

01. वर्ष 2019 में जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अंतिम कार्रवाई क्या हुई?

02. 18 जून 2021 के मिशन संचालक के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं?

03. PHC बेलतरा JDS की कथित करीब ₹55 हजार की राशि की वसूली हुई या नहीं?

04. यदि कार्रवाई हुई तो उसके दस्तावेज CMHO कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं या नहीं?

05. छह नियमित कर्मचारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का नियमसम्मत आधार क्या था?

06. क्या तीन माह बीत जाने के बाद कोषालय छह कर्मचारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि के बिल को बिना आधार दस्तावेजों के स्वीकृत करेगा?

07. क्या तीन माह के एरियर्स भुगतान की स्वीकृति प्रदान की जाएगी?

08. अतिरिक्त भुगतान के कारण शासकीय कोष को होने वाली संभावित वित्तीय क्षति के लिए किसे जिम्मेदार माना जाएगा?

📰 VANDANA NEWS की सीधी बात

यदि संबंधित फाइलें और रिकॉर्ड स्पष्ट हैं, तो उन्हें सामने लाने में आखिर क्या हर्ज है?

यह मामला आरोपों का है या प्रशासनिक चूक का—इसका फैसला बयानबाजी से नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट, विभागीय आदेश, वसूली रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं—

क्या वर्षों पुराने इस मामले की फाइल दोबारा खुलेगी?

क्या कथित राशि की वसूली और विभागीय कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?

क्या विगत दो वर्षों में करोड़ों रुपये के बजट के उपयोग से जुड़े तथ्यों की भी जांच और जानकारी सामने आएगी?

इन सवालों के जवाब अब संबंधित विभागीय अधिकारियों और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगे।

नोट: इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोप और दावे शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों एवं दस्तावेजों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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