बैगा जाति प्रमाण पत्र पर 55 लोगों की सरकारी नौकरी का आरोप, पूर्व विधायक ने राज्य स्तरीय जांच की उठाई मांग

img 20260910 wa0248

बिलासपुर के ग्राम पौड़ी का मामला, राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को भेजा पत्र

बिलासपुर/मस्तूरी। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पौड़ी में विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र तैयार कर 55 लोगों द्वारा शासकीय सेवा में नियुक्ति प्राप्त किए जाने का आरोप सामने आया है। मामले को लेकर भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को पत्र भेजकर राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से जांच कराने की मांग की है।

पूर्व विधायक ने शिकायत में मांग की है कि यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त करने के साथ-साथ उनके आधार पर प्राप्त सरकारी नियुक्तियों की समीक्षा की जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

कूट रचित दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप

पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा 6 सितंबर 2026 को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पौड़ी, थाना सीपत, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर में अन्य जातियों के लोगों द्वारा कथित तौर पर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के जाति प्रमाण पत्र तैयार कराए गए।

शिकायत के मुताबिक इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर बिलासपुर एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 55 लोगों द्वारा शासकीय नौकरी हासिल करने का दावा किया गया है।

राज्यपाल और शासन को भेजा गया पत्र

पूर्व विधायक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को लिखित शिकायत भेजी है।

शिकायत में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से कराई जाए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के साथ उनकी नियुक्तियों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

बैगा समाज के पदाधिकारियों ने दी जानकारी

शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि नांगा बैगा जन शक्ति संगठन के अध्यक्ष/सचिव राम सिंह बैगा, जेड राम बैगा तथा प्रेमलाल बैगा, जिलाध्यक्ष बैगा समाज जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित अन्य बैगा समाज के पदाधिकारियों द्वारा मामले की जानकारी पूर्व विधायक को दी गई।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैगा जाति प्रमाण पत्र हासिल कर 55 लोगों ने सरकारी नौकरी प्राप्त की है।

हालांकि, इन आरोपों की अभी सक्षम जांच एजेंसी या राज्य स्तरीय जाति सत्यापन समिति द्वारा पुष्टि किया जाना बाकी है।

वर्ष 2025 में भी की गई थी शिकायत

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले को लेकर 16 सितंबर 2025 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन और अध्यक्ष, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग को भी लिखित शिकायत की गई थी।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने दोबारा शासन का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करते हुए राज्य स्तरीय जांच की मांग की है।

“इनका बैगा समाज से कोई संबंध नहीं” — शिकायतकर्ताओं का दावा

शिकायत में संबंधित लोगों के संबंध में दावा किया गया है कि उनका विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज से वास्तविक संबंध नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्तियों के पूर्वज भी कथित तौर पर इन क्षेत्रों में निवासरत नहीं थे।

अपने दावों के समर्थन में ग्रामवासियों का कथित पंचनामा तथा ग्रामवार बैगा परिवारों की सूची संलग्न किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस सूची में सरकारी सेवा में कार्यरत बताए जा रहे 55 लोगों के नाम शामिल नहीं हैं।

विधानसभा में भी उठ चुका है मामला

पूर्व विधायक के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले से संबंधित विषय को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्न के रूप में उठाया जा चुका है।

ऐसे में अब राज्य स्तरीय जांच की मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी अथवा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आरक्षित श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र हासिल कर सरकारी नौकरी प्राप्त की है, तो संबंधित नियमों के तहत प्रमाण पत्र और नियुक्ति की वैधानिकता की समीक्षा की जा सकती है।

जांच में इन सवालों के जवाब तलाशने की मांग

पूर्व विधायक ने राज्य स्तरीय जांच के माध्यम से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि—

  • 55 कथित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किए गए?
  • प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए?
  • प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक और वैध थे या नहीं?
  • संबंधित व्यक्तियों का बैगा जनजाति से वास्तविक संबंध है या नहीं?
  • किन विभागों और किन पदों पर इन लोगों को सरकारी नियुक्तियां मिलीं?
  • नियुक्ति के समय जाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
  • यदि प्रमाण पत्र गलत पाए जाते हैं तो उन्हें जारी करने और उनका उपयोग करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो नियुक्तियों की भी हो सकती है समीक्षा

पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त किया जाए। साथ ही, उनके आधार पर प्राप्त शासकीय नियुक्तियों की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविकता

फिलहाल पूरा मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। संबंधित 55 व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्रों और सरकारी नियुक्तियों की वैधानिकता की पुष्टि अभी सक्षम जांच एजेंसी अथवा राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति द्वारा किया जाना बाकी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले संबंधित व्यक्तियों को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

अब देखना होगा कि शासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति को जिम्मेदारी दी जाती है।

यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आरक्षित वर्ग के अधिकारों, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और जाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या 55 कथित नियुक्तियों की निष्पक्ष राज्य स्तरीय जांच होगी और यदि जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

img 20260910 wa0249
Advertisement 1
Advertisement 2
Advertisement 3

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *