हरदीबाजार अस्पताल के स्थानांतरण के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश, मांगें पूरी होने तक आंदोलन की चेतावनी

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मुआवजा विसंगति, रोजगार और बसाहट की मांगों को लेकर ग्रामीण लामबंद, तहसील कार्यालय में हुई आपात बैठक

हरदीबाजार, कोरबा। एसईसीएल दीपका एरिया परियोजना के विस्तार के चलते हरदीबाजार स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) के स्थानांतरण की कवायद को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, भू-विस्थापितों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मूल मांगों और अधिकारों से जुड़े मामलों का निराकरण नहीं किया जाता, तब तक अस्पताल का स्थानांतरण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा जबरन अस्पताल हटाने का प्रयास किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरदीबाजार तहसील कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) पाली रोहित सिंह और तहसीलदार अमित क्रेकेटा की मौजूदगी में आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में हरदीबाजार पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, जनपद सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

मुआवजा पत्रक में 40 प्रतिशत विसंगति का आरोप

बैठक के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दीपका एरिया प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि नापी-सर्वे के बाद एसईसीएल द्वारा तैयार किए गए मुआवजा पत्रक में कथित तौर पर 40 प्रतिशत की कमी/विसंगति दर्शाई गई है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

ग्रामीणों ने दावा किया कि नियम-कानून में इस तरह के 40 से 60 प्रतिशत के प्रावधान का उल्लेख नहीं है और मुआवजा पत्रक के माध्यम से किसानों को कथित रूप से गुमराह किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से क्षेत्र में निवास कर रहे मूल किसानों को उनकी भूमि का उचित मूल्य और अधिकार मिलना चाहिए।

केंद्रीय कोयला मंत्री के निर्देशों का हवाला

ग्रामीणों ने बैठक में हाल ही में कटघोरा विधायक के नेतृत्व में विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय कोयला मंत्री से हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र की समस्याओं और विस्थापितों की मांगों से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया था, जिसके बाद एसईसीएल बिलासपुर मुख्यालय को किसानों के अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो रहा है।

ग्रामीणों ने रखीं चार प्रमुख मांगें

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बैठक में अपनी प्रमुख मांगों को सामने रखा। इनमें—

  • मुआवजा विसंगति का तत्काल समाधान कर किसानों को भूमि का उचित और वास्तविक मूल्य देने की मांग।
  • भूमि अधिग्रहण के एवज में पात्र किसानों एवं विस्थापितों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराने की मांग।
  • नए बसाहट स्थल पर चल रहे निर्माण एवं विकास कार्यों में तेजी लाने की मांग।
  • किसानों और विस्थापितों के मौलिक एवं विधिक अधिकारों का समाधान होने तक हरदीबाजार अस्पताल को यथावत रखने की मांग शामिल है।

विकास के विरोध में नहीं, अधिकारों के लिए संघर्ष

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे क्षेत्र के विकास और कोयला खदान विस्तार के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि विकास कार्य किसानों और भू-विस्थापितों के हितों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से आगे आकर उनकी समस्याओं का न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए खदान विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

फिलहाल हरदीबाजार अस्पताल के स्थानांतरण को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है।

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