उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बाबाघाट धाम में किया रुद्राभिषेक, सौंदर्यीकरण कार्यों का किया लोकार्पण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बाबाघाट धाम में किया रुद्राभिषेक, सौंदर्यीकरण कार्यों का किया लोकार्पण

लोरमी, 24 अगस्त 2026। पावन श्रावण मास के अंतिम सोमवार को लोरमी स्थित श्री बाबाघाट धाम में आस्था और विकास का सुंदर संगम देखने को मिला। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमीवासियों के साथ परम पूज्य श्री श्री 108 शिवानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में भगवान भोलेनाथ का विधिवत रुद्राभिषेक किया। उन्होंने महादेव से प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

रुद्राभिषेक के पश्चात उप मुख्यमंत्री श्री साव ने श्री बाबाघाट धाम मंदिर परिसर में कराए गए सौंदर्यीकरण एवं उन्नयन कार्यों का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया।

‘विरासत भी, विकास भी’ की सोच से हुआ बाबाघाट का विकास

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि ‘विरासत भी, विकास भी’ की सोच के साथ लोरमी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण के बाद बाबाघाट धाम का स्वरूप अब और अधिक भव्य एवं आकर्षक हो गया है। इससे श्रद्धालुओं को स्वच्छ, शांत और भक्तिमय वातावरण मिलेगा।

उन्होंने कहा कि श्री बाबाघाट धाम लोरमी का प्राचीन धार्मिक स्थल है। वर्षों से यहां साधु-संत पूजन, हवन और विश्राम करते रहे हैं। समय के साथ यह स्थल जीर्ण-शीर्ण हो गया था, लेकिन सौंदर्यीकरण एवं उन्नयन कार्यों के बाद इसे नया स्वरूप मिला है।

धार्मिक स्थलों को भव्य स्वरूप देने पर जोर

श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। काशी में कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल लोक कॉरिडोर और अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी भोरमदेव कॉरिडोर और मां बम्लेश्वरी मंदिर में ‘प्रसाद’ योजना के तहत विकास कार्य किए जाएंगे। वहीं रतनपुर धाम के विकास की दिशा में भी कार्य जारी हैं। इसी कड़ी में लोरमी के बाबाघाट धाम को भी भव्य एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने लोरमीवासियों से अपील की कि वे बाबाघाट धाम के सुंदर स्वरूप को बनाए रखने में सहयोग करें और यहां नियमित रूप से धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का आयोजन करते रहें।

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