RTI में देरी पड़ी भारी, तत्कालीन ASP पर ₹10 हजार की शास्ति

RTI में देरी पड़ी भारी, तत्कालीन ASP पर ₹10 हजार की शास्ति

अनूपपुर/भोपाल। महेश प्रजापति। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराना तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) को भारी पड़ गया। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने मामले में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला अनूपपुर जगन्नाथ मरकाम पर ₹10,000 की शास्ति लगाए जाने का आदेश दिया है।

12 अप्रैल 2023 को मांगी गई थी जानकारी

मामला वर्ष 2023 में दायर RTI आवेदन से जुड़ा है। उपलब्ध आदेश के अनुसार आवेदक ने 12 अप्रैल 2023 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी। आयोग ने पाया कि निर्धारित समय-सीमा में आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

आयोग ने इसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7 के प्रावधानों का उल्लंघन माना।

धारा 20(1) के तहत ₹10 हजार की शास्ति

मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने मामले में RTI अधिनियम की धारा 20(1) के तहत तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी पर ₹10,000 की शास्ति निर्धारित की है। कानून के अनुसार, यदि लोक सूचना अधिकारी बिना उचित कारण निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराता है, तो उस पर दंड लगाया जा सकता है।

RTI अधिनियम के तहत सूचना देने में देरी की स्थिति में सूचना आयोग को प्रतिदिन के हिसाब से शास्ति लगाने का अधिकार है। इसकी अधिकतम सीमा ₹25,000 तक हो सकती है।

वेतन से कटौती कर जमा होगी राशि

आयोग के आदेश में निर्धारित ₹10,000 की शास्ति राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटकर निर्धारित माध्यम से जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही राशि जमा करने के बाद उसका अनुपालन प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

आदेश में शास्ति राशि जमा करने की कार्रवाई के लिए 21 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे का समय निर्धारित किए जाने का भी उल्लेख है।

RTI में अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही

इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि RTI आवेदन सरकारी विभाग से संबंधित होने के बावजूद सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित लोक सूचना अधिकारी (PIO) की वैधानिक जिम्मेदारी होती है।

यदि सूचना आयोग यह पाता है कि बिना उचित कारण सूचना देने में देरी हुई या RTI कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से शास्ति लगाई जा सकती है।

प्रथम अपील और द्वितीय अपील का प्रावधान

RTI अधिनियम की धारा 19 के तहत निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने या निर्णय से असंतुष्ट होने पर आवेदक पहले प्रथम अपील कर सकता है। इसके बाद आवश्यकता होने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील का प्रावधान है।

सरकारी अधिकारियों के लिए संदेश

मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के इस आदेश को सरकारी विभागों में RTI आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराना केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार RTI अधिनियम के तहत दंडनीय लापरवाही भी बन सकता है।

यह मामला यह भी स्पष्ट करता है कि पुलिस विभाग सहित किसी भी सरकारी विभाग में लोक सूचना अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी को RTI अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

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