कोसा की चमक अब वैश्विक बाजार तक, मुख्यमंत्री साय ने लॉन्च किया प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’

कोसा की चमक अब वैश्विक बाजार तक, मुख्यमंत्री साय ने लॉन्च किया प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री ने बांटी 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता और पुरस्कार राशि

रायपुर, 8अगस्त 2026। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बुनकरों, शिल्पकारों, रेशम कृषकों, माटी शिल्पियों और अन्य हितग्राहियों के साथ मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ रहा। मुख्यमंत्री ने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया। ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर तैयार यह ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया। एनआईसी के सहयोग से विकसित इस डिजिटल प्रणाली के जरिए हथकरघा उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन और वितरण को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

‘लोकल टू ग्लोबल’ बनेगा छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। सरकार का उद्देश्य इन उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की नई पहचान दिलाना है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, बेहतर मार्केटिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता की पहचान भी है। बुनकरों और शिल्पकारों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराने से उनकी आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

47 प्रदर्शनियों में करीब 10 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 47 प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई। इस पहल से बुनकरों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिला।

उन्होंने बताया कि इसी अवधि में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई है।

हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

वहीं खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा पांच विक्रय भंडारों तथा केंद्रीय वस्त्रागार के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी की गई है।

पांच प्रमुख एयरपोर्ट पर खुलेंगे हैंडलूम और हस्तशिल्प शोरूम

छत्तीसगढ़ के हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल भी स्थानीय उत्पादों को आधुनिक विपणन मंच उपलब्ध कराएगा।

नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है। इससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना से डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर विकसित होंगे।

आत्मसमर्पित महिलाओं का रैंप वॉक बना कार्यक्रम का खास आकर्षण

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं का रैंप वॉक लोगों के लिए विशेष आकर्षण रहा। महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और अन्य हैंडलूम परिधानों का प्रदर्शन किया।

यह प्रस्तुति आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही महिलाओं के आत्मविश्वास और पुनर्वास की सकारात्मक तस्वीर के रूप में सामने आई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।

मुख्यमंत्री साय ने इन महिलाओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। बताया गया कि इनमें से लगभग सभी महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं।

मुख्यमंत्री ने खरीदी कोसा साड़ी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी में लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम और माटीकला बोर्ड सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉल देखे।

मुख्यमंत्री ने कारीगरों से उनके उत्पादों, गुणवत्ता, बाजार और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। इसी दौरान उन्होंने हथकरघा स्टॉल से तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सम्मान है।

बुनकरों और शिल्पकारों को मिली सहायता

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सहायता और पुरस्कार राशि वितरित की।

  • कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।
  • 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि प्रदान की गई।
  • 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी गई।
  • पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता दी गई।
  • 85 बुनकरों को उन्नत करघे और सहायक उपकरण वितरित किए गए।
  • 21 रेशम कृषकों को सिल्क समग्र योजना के तहत सहायता राशि दी गई।
  • 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट प्रदान किए गए।
  • 70 पंजीकृत माटी शिल्पियों को विद्युत चाक वितरित किए गए।

इसके अलावा साइटसेवर्स इंडिया के सहयोग से नेत्र परीक्षण कराने वाले बुनकरों को चश्मों का वितरण भी किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष ने हर साल हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1 लाख 20 हजार परिवार हथकरघा एवं उससे जुड़ी गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने नागरिकों से हर वर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बुनकरों की मेहनत, उनकी कला और छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा को जीवित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

ग्रामोद्योग मंत्री ने स्वदेशी आंदोलन की विरासत को याद किया

ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन ने देश में आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत किया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी को देशभर में विशिष्ट पहचान वाला उत्पाद बताते हुए हथकरघा, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान में भाग लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदने से बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका मजबूत होती है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती मिलती है। स्वदेशी उत्पाद के साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी साझा करने वाले चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत किए जाने की बात भी कही गई।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, संस्कृत विद्या मंडलम के अध्यक्ष राजेश राजपूत, सचिव राजेश सिंह राणा, चुन्नीलाल साहू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बुनकर, शिल्पकार और बड़ी संख्या में कारीगर मौजूद रहे।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। ‘कोशल फैब’, डिजिटल इन्वेंट्री मैनेजमेंट और एयरपोर्ट शोरूम जैसी पहलों से छत्तीसगढ़ के कोसा और हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की सरकार की रणनीति स्पष्ट होती है।

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