अवैध कॉलोनी का खेल! 17 दिन में बदला नगर पालिका का रुख, ₹71.65 लाख के विकास कार्य पहले निरस्त, फिर मांगा मार्ग संरचना अनुमोदन

अवैध कॉलोनी का खेल! 17 दिन में बदला नगर पालिका का रुख, ₹71.65 लाख के विकास कार्य पहले निरस्त, फिर मांगा मार्ग संरचना अनुमोदन

गरियाबंद। नगर पालिका परिषद गरियाबंद के आधिकारिक दस्तावेज़ों ने वार्ड क्रमांक 15 स्थित होटल सिटी रिजेंसी के समीप विकसित कथित अवैध कॉलोनी को लेकर बड़ा प्रशासनिक विरोधाभास सामने ला दिया है। एक ओर नगर पालिका ने इसी कॉलोनी को अवैध बताते हुए ₹71.65 लाख के विकास कार्य निरस्त कर दिए, वहीं मात्र 17 दिन बाद उसी क्षेत्र के लिए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से मार्ग संरचना अनुमोदन का प्रस्ताव भेज दिया।

नगर पालिका द्वारा 23 फरवरी 2026 को कलेक्टर गरियाबंद को भेजे गए पत्र के अनुसार अधोसंरचना मद से स्वीकृत ₹22.68 लाख की सीसी रोड तथा 15वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत ₹48.97 लाख की आरसीसी ड्रेन एवं कलवर्ट निर्माण योजना को इसलिए निरस्त किया गया क्योंकि प्रस्तावित स्थल कथित रूप से अवैध कॉलोनी के दायरे में आता था। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि इन कार्यों के स्थान पर नए विकास कार्यों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

हालांकि, इसके ठीक 17 दिन बाद 12 मार्च 2026 को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को भेजे गए एक अन्य पत्र में नगर पालिका ने इसी क्षेत्र के कई खसरा नंबरों के लिए मार्ग संरचना अनुमोदन का प्रस्ताव भेजा। इस पत्र में दावा किया गया कि क्षेत्र में सीसी रोड, नाली, विद्युत पोल और ट्रांसफार्मर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा लगभग 75 प्रतिशत विकास कार्य पूरा हो चुका है।

यहीं से कई सवाल खड़े होते हैं। यदि यही क्षेत्र अवैध कॉलोनी था और इसी आधार पर लाखों रुपये के विकास कार्य निरस्त किए गए थे, तो कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र के लिए मार्ग संरचना अनुमोदन किस आधार पर मांगा गया? क्या इस दौरान कॉलोनी की स्थिति बदल गई थी या प्रशासनिक निर्णयों में विरोधाभास है?

स्थानीय निवासी ने विकास के दावों पर उठाए सवाल

वार्ड क्रमांक 15 निवासी जुनैद खान का कहना है कि नगर पालिका द्वारा किए गए 75 प्रतिशत विकास के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार क्षेत्र में न तो पर्याप्त सड़कें हैं और न ही समुचित नाली व्यवस्था। उनका दावा है कि 20 प्रतिशत विकास भी दिखाई नहीं देता।

अवैध कॉलोनी में निर्माण जारी, भवन अनुज्ञा पर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार कथित अवैध कॉलोनी में आज भी कई मकानों का निर्माण जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि नगर पालिका इस कॉलोनी को अब भी अवैध मानती है तो इन भवनों का निर्माण किस आधार पर हो रहा है? क्या इनके लिए विधिवत भवन अनुज्ञा जारी की गई है, या बिना अनुमति निर्माण कार्य जारी हैं? यदि अनुमति नहीं दी गई, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

सीएमओ का जवाब

इस मामले में नगर पालिका की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) संध्या वर्मा ने बताया कि संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि क्षेत्र में लंबे समय से निर्माण कार्य लगातार जारी हैं।

अब यह मामला नगर पालिका के निर्णयों, प्रशासनिक पारदर्शिता और अवैध कॉलोनियों के नियमन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इन विरोधाभासी दस्तावेज़ों और निर्माण गतिविधियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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