परिक्रमा पथ पर उठे सवाल: जहां रास्ते पहले से मौजूद, वहां करोड़ों की परियोजना क्यों?

डोंगरगढ़ में किसानों और स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग
✍️डोंगरगढ़। धर्मनगरी डोंगरगढ़ में प्रस्तावित परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और किसानों ने परियोजना की आवश्यकता, लागत और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए पहले से पर्याप्त मार्ग मौजूद हैं, तब करोड़ों रुपये खर्च कर नई परियोजना लाने का औचित्य स्पष्ट नहीं है।
स्थानीय लोगों के अनुसार डोंगरगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से माँ बम्लेश्वरी मंदिर से जुड़े धार्मिक पर्यटन पर आधारित है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, ऑटो चालकों और स्थानीय नागरिकों की आजीविका चलती है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसर हैं, इसलिए सरकार को रोजगार सृजन और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
♦️पहले से मौजूद हैं प्रमुख मार्ग
नागरिकों का कहना है कि प्रज्ञागिरी और चंद्रगिरि जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए पहले से बेहतर और सुगम मार्ग उपलब्ध हैं। वहीं जटाशंकर मंदिर मार्ग में केवल सीमित सुधार और सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता है, जिसे अपेक्षाकृत कम लागत में पूरा किया जा सकता है।
इसी आधार पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अधिकांश धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए मार्ग पहले से मौजूद हैं, तो नए परिक्रमा पथ निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
♦️भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर उठे सवाल
परियोजना को लेकर सबसे अधिक चर्चा संभावित भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर हो रही है। प्रभावित किसानों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निजी भूमि खरीद के नाम पर कुछ लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की आशंका है।
लोगों का कहना है कि यदि पर्याप्त सरकारी या राजस्व भूमि उपलब्ध है, तो निजी जमीन अधिग्रहण को प्राथमिकता देने के पीछे की वजह स्पष्ट की जानी चाहिए। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि भूमि चयन और मुआवजा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
♦️पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली इस परियोजना में निर्माण कार्य और मुआवजे से जुड़े पहलुओं की निष्पक्ष निगरानी जरूरी है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नागरिकों ने परियोजना की लागत, रूट चयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि परियोजना जनहित में है, तो प्रशासन को इससे जुड़े दस्तावेज, नक्शे और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर हो सकें।
♦️विकास बनाम प्राथमिकताएं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर अनावश्यक परियोजनाओं पर सार्वजनिक धन खर्च किए जाने पर सवाल उठाना उनका अधिकार है। लोगों की मांग है कि सरकार पहले रोजगार, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दे।
फिलहाल परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर डोंगरगढ़ में बहस और विरोध दोनों तेज हो गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इन सवालों का क्या जवाब देता है और क्या परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।


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