
कोरबा/बिलासपुर। नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 15 में होने वाले उपचुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चुनाव लड़ने की इच्छुक प्रत्याशी शोभा तिग्गा ने अपना नामांकन पत्र स्वीकार नहीं किए जाने के मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव लड़ने से रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा नियमों से परे जाकर अतिरिक्त शर्तें लगाई गईं।
याचिकाकर्ता शोभा तिग्गा ने अपने अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। मामले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका तथा वार्ड 15 के रिटर्निंग ऑफिसर को पक्षकार बनाया गया है।
♦️क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, वार्ड 15 निवासी शोभा तिग्गा ने 11 मई 2026 को जारी चुनाव अधिसूचना के तहत पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 मई 2026 निर्धारित थी, जबकि मतदान 1 जून और मतगणना 4 जून को प्रस्तावित है।
शोभा तिग्गा का कहना है कि वर्ष 2021 में उन्होंने नगर पालिका दीपका के चौपाटी परिसर में स्थित दुकान क्रमांक 06 के संचालन हेतु अनुबंध किया था और उससे संबंधित सभी बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया था। इसके बावजूद नामांकन जमा करने के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा उनसे उक्त दुकान के संबंध में नगर पालिका से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अथवा पंचनामा प्रस्तुत करने को कहा गया।
♦️एनओसी की अनिवार्यता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता का दावा है कि चुनाव लड़ने के लिए ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, जिसके तहत पूर्व में किराए पर ली गई दुकान से संबंधित एनओसी प्रस्तुत करना आवश्यक हो। उनका कहना है कि नगर पालिका की ओर से कभी कोई बकाया नोटिस, मांग पत्र या वसूली कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए एनओसी की शर्त पूरी तरह मनमानी और गैरकानूनी है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि एनओसी आवश्यक थी तो उसे जारी करने का अधिकार भी नगर पालिका प्रशासन के पास ही था, लेकिन आवेदन देने के बावजूद प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।
♦️प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप
शोभा तिग्गा ने अदालत में दायर याचिका में कहा है कि उनकी उम्मीदवारी को बाधित करने के उद्देश्य से ऐसी शर्त लगाई गई, जो कानून में कहीं निर्धारित नहीं है। उनका दावा है कि वे छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत किसी भी प्रकार की अयोग्यता की श्रेणी में नहीं आतीं और उनके विरुद्ध कोई वैध बकाया भी लंबित नहीं है।
याचिका में 18 मई 2026 को जारी पत्र को निरस्त करने तथा बिना अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग किए नामांकन स्वीकार करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
♦️हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
मामला अब उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में वार्ड 15 के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि शोभा तिग्गा को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिलेगा या नहीं।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत दावों पर आधारित हैं। अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय एवं संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।

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