लोकतंत्र पर हमला: सूरजपुर में पत्रकारों को बंधक बनाकर पीटा, खदान क्षेत्र में गुंडागर्दी

लोकतंत्र पर हमला: सूरजपुर में पत्रकारों को बंधक बनाकर पीटा, खदान क्षेत्र में गुंडागर्दी

सूरजपुर | विशेष रिपोर्ट
✍️छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भास्कर पारा कोयला खदान क्षेत्र से एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ प्रेस की स्वतंत्रता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार, 19 अप्रैल को तीन पत्रकारों के साथ मारपीट, बंधक बनाना और सबूत मिटाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
♦️मामला कैसे शुरू हुआ?
जानकारी के अनुसार,
चंद्र प्रकाश साहू (संपादक, लोक विचार न्यूज़)
लोकेश गोस्वामी (संपादक, सीजी पब्लिक न्यूज़)
मनीष जायसवाल (प्रदेश रिपोर्टर, सीजी वाल न्यूज़)
को खदान से जुड़ी अनियमितताओं और स्थानीय विरोध की सूचना मिली थी। इसी के आधार पर वे मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे।
पत्रकार अपनी कार से खदान के मुख्य गेट तक पहुंचे, जहां सुरक्षा गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने आसपास के ग्रामीणों से बातचीत की और अमृत सरोवर योजना के तहत बने तालाब और स्नान गृह का निरीक्षण किया।
♦️सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी
खदान के पीछे के हिस्से में पहुंचे पत्रकारों ने पाया कि:
ब्लास्टिंग का समय (सुबह 10 से दोपहर 3 बजे) बोर्ड पर दर्ज था
लेकिन क्षेत्र में पर्याप्त फेंसिंग नहीं थी
चेतावनी बोर्ड सीमित थे
ग्रामीणों का आवागमन जारी था
यह स्पष्ट रूप से सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाता है।
♦️सड़क किनारे रिपोर्टिंग पर विवाद
पत्रकार मुख्य सड़क से करीब 200 मीटर दूर खड़े होकर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
वे सार्वजनिक स्थान से रिपोर्टिंग कर रहे थे, न कि खदान परिसर के भीतर से।
इसी दौरान गार्ड और सुपरवाइजर ने उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी और रिपोर्टिंग रोकने का प्रयास किया।
♦️अचानक हमला: बोलेरो में आए हमलावर
करीब शाम 4 बजे एक सफेद बोलेरो में 5-6 लोग पहुंचे और पत्रकारों पर हमला कर दिया।
हमले के दौरान:
कैमरा और माइक छीनकर फेंक दिए गए
मोबाइल फोन जब्त किए गए
गाली-गलौज और मारपीट की गई
जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से पीटा गया
चंद्र प्रकाश साहू को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
♦️बंधक बनाकर खदान परिसर में ले जाया गया
हमले के बाद तीनों पत्रकारों को जबरन वाहन में बैठाकर खदान परिसर में ले जाया गया।
वहां:
पहचान पत्र और आधार कार्ड छीन लिए गए
जमीन पर बैठाकर पूछताछ की गई
दबाव डालकर झूठा बयान दिलवाने की कोशिश की गई कि वे “अवैध रूप से खदान में घुसे थे”
♦️धमकी और अपमान
पूछताछ के दौरान पत्रकारों से अभद्र भाषा में बात की गई और धमकाया गया।
कथित तौर पर कहा गया:
“बड़े पत्रकार पैसा लेकर चले जाते हैं… तुम जैसे छोटे पत्रकार यहां कैसे आ गए?”
करीब एक दर्जन लोगों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की।
♦️3-4 घंटे तक बंधक
तीनों पत्रकारों को करीब 3-4 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया।
इस दौरान:
मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई
बाहरी संपर्क नहीं करने दिया गया
शाम करीब 7 बजे उन्हें छोड़ा गया।
♦️सबूत मिटाने की कोशिश
छोड़ने से पहले:
मोबाइल से सभी वीडियो फुटेज डिलीट कर दिए गए
उनकी कार को भी कब्जे में रखा गया
यह घटना सबूत मिटाने की गंभीर कोशिश को दर्शाती है।
♦️तबीयत बिगड़ी, फिर राहत
घटना के दौरान मनीष जायसवाल की तबीयत बिगड़ गई और उनका शुगर लेवल गिर गया।
इसके बाद उन्हें चाय दी गई, लेकिन यह घटना की गंभीरता को कम नहीं करता।
♦️बड़े सवाल खड़े
यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है:
क्या पत्रकार अब जमीनी सच्चाई नहीं दिखा सकते?
क्या औद्योगिक क्षेत्रों को “नो रिपोर्टिंग ज़ोन” बना दिया गया है?
क्या सच दिखाने वालों को इसी तरह दबाया जाएगा?
♦️शिकायत और कार्रवाई की मांग
इस मामले में हमर उत्थान सेवा समिति ने थाना झिलमिली में शिकायत दर्ज कराई है।
मांग की गई है:
निष्पक्ष जांच
आरोपियों की गिरफ्तारी
पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
♦️निष्कर्ष
सूरजपुर की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
अब नजर प्रशासन पर टिकी है—
क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी दबा दिया जाएगा?
यह घटना प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकती है।

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