मुंगेली जिले में धान खरीदी का रिकॉर्ड, 51 लाख क्विंटल से अधिक उपार्जन

मुंगेली जिले में धान खरीदी का रिकॉर्ड, 51 लाख क्विंटल से अधिक उपार्जन

किसानों को 1212 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान
मुंगेली, 29 जनवरी 2026।
शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से जारी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिले की 66 समितियों के 105 उपार्जन केन्द्रों में पंजीकृत 1 लाख 10 हजार 900 से अधिक किसानों से अब तक 51 लाख 19 हजार 670 क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की जा चुकी है।
खरीदे गए धान में 28 लाख 22 हजार 890 क्विंटल मोटा, 330 क्विंटल पतला तथा 22 लाख 96 हजार 440 क्विंटल सरना धान शामिल है। उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव लगातार जारी है और अब तक 27 लाख 86 हजार 672 क्विंटल से अधिक धान का उठाव किया जा चुका है।
धान विक्रय करने वाले किसानों को अब तक 1212 करोड़ 85 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। किसानों को माइक्रो एटीएम एवं चेक के माध्यम से त्वरित भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 3 हजार किसानों को करीब 12 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
सीमाओं और चेक पोस्ट पर कड़ी निगरानी
कलेक्टर के निर्देशानुसार अवैध धान भंडारण एवं परिवहन पर रोक लगाने जिले की सीमाओं और चेक पोस्टों पर निगरानी और सख्त की गई है। संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की जा रही है तथा आंतरिक चेक पोस्टों पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं। निगरानी दल द्वारा रात्रिकालीन गश्त भी की जा रही है।
कोचियों और बिचौलियों के माध्यम से अवैध धान खपाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) स्थापित किया गया है, जिससे खरीदी, भंडारण और परिवहन की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
आईसीसीसी के माध्यम से रियल टाइम ट्रैकिंग
राज्य शासन के निर्देशानुसार मिलर्स द्वारा समितियों से धान उठाव की प्रक्रिया की जा रही है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी आईसीसीसी कमांड सेंटर के माध्यम से की जा रही है। धान परिवहन में लगे वाहनों को जीपीएस के जरिए ट्रैक किया जा रहा है। यदि कोई वाहन अधिक समय तक एक स्थान पर रुकता है, मार्ग बदलता है या निर्धारित क्षमता से अधिक धान का परिवहन करता है, तो इसकी सूचना पोर्टल पर स्वतः प्रदर्शित होती है, जिसकी जांच जिला स्तर पर अधिकारी करते हैं।

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