किसानों में टोकन को लेकर हाहाकार, ऑनलाइन व्यवस्था बनी परेशानी का कारण

किसानों में टोकन को लेकर हाहाकार, ऑनलाइन व्यवस्था बनी परेशानी का कारण

जिला रायगढ क्षेत्र के हजारों किसान धान बिक्री से वंचित होने की कगार पर

जिला  रायगढ़ छत्तीसगढ़, 30 नवंबर।
जिला रायगढ़ क्षेत्र के कापू धर्मजयगध सहकारी समिति में धान खरीदी को लेकर किसानों में भारी आक्रोश और हताशा का माहौल बना हुआ है। 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन इस वर्ष शासन द्वारा ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू कर दिए जाने से ग्रामीण किसान गंभीर रूप से परेशान हैं। पहले जहां ऑफलाइन टोकन की सुविधा थी, अब वह पूरी तरह बंद कर दी गई है, जिससे मोबाइल और इंटरनेट से अनभिज्ञ किसान टोकन कटवाने के लिए भटकने को मजबूर हैं।

किसानों का कहना है कि सुबह 8 बजे से 10 बजे तक टोकन कटने का समय निर्धारित है, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में मात्र 5 से 10 मिनट में ही टोकन अपने आप बंद हो जाते हैं, जिससे केवल 20–25 किसान ही एक दिन में धान बेच पा रहे हैं। जबकि कापू सहकारी समिति में 1929 किसान पंजीकृत हैं और लिपटी उप बिक्री केंद्र में 1247 किसान पंजीकृत हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि हजारों किसान धान बेचने से वंचित हो रहे हैं।

क्षेत्र के अधिकांश किसान मोबाइल नेट और ऐप की जानकारी नहीं रखते, जिससे वे टोकन कटवाने में पूरी तरह असहाय हो गए हैं। किसानों ने मीडिया के माध्यम से ऑफलाइन टोकन व्यवस्था तत्काल शुरू करने की मांग जनहित में की है। किसानों का कहना है कि उनकी इस गंभीर समस्या की ओर अब तक किसी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इधर टोकन रकबा घटने-बढ़ने को लेकर भी किसान परेशान हैं। पहले रकबा बढ़वाने के लिए किसानों को रात-रात भर लाइन में खड़ा रहना पड़ा और अब टोकन के लिए भी वही स्थिति बन गई है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत किसानों की धान कटाई पूरी हो चुकी है और वे धान बेचने को आतुर हैं, लेकिन टोकन नहीं मिलने से वे समय पर धान नहीं बेच पा रहे हैं। यदि ऑफलाइन टोकन की व्यवस्था शीघ्र शुरू नहीं हुई तो हजारों किसान धान बिक्री से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे।

कापू सहकारी समिति में सबसे अधिक आदिवासी एवं अन्य पिछड़े वर्ग के किसान जुड़े हुए हैं, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। शासन की यह महती योजना किसानों के हित में है, लेकिन नीतिगत क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही से किसान अत्यंत दुखी हैं। किसानों का कहना है कि समय रहते सरकार ने यदि व्यवस्था को सरल नहीं किया तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

इस संबंध में जब धर्मजयगध के एसडीएम प्रवीण भगत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि,
“किसान स्वयं टोकन काट रहे हैं, किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है।”
जबकि किसानों का कहना है कि धर्मजयगध अनुभाग आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और यहां के किसानों को वास्तव में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने यह भी कहा कि प्रवीण भगत स्वयं आदिवासी किसान परिवार से हैं, ऐसे में उन्हें किसानों के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।

किसानों का प्रतिनिधिमंडल इस गंभीर जन समस्या को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से बगिया जाकर फरियाद करने की तैयारी में है। किसानों का साफ कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने तत्काल ऑफलाइन टोकन की व्यवस्था बहाल नहीं की, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

कुल मिलाकर ऑनलाइन टोकन व्यवस्था इस आदिवासी क्षेत्र के किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि भारी संकट का कारण बन गई है।

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