आउटसोर्सिंग मजदूरों के लिए वर्कशॉप में गूंजी ‘स्थायीकरण’ और ‘शोषण मुक्ति’ की मांगकुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत गेवरा बस्ती में वर्कशॉप आयोजित

आउटसोर्सिंग मजदूरों के लिए वर्कशॉप में गूंजी ‘स्थायीकरण’ और ‘शोषण मुक्ति’ की मांगकुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत गेवरा बस्ती में वर्कशॉप आयोजित

कुसमुंडा//कोरबा:-
खनन क्षेत्र के आउटसोर्सिंग एवं अन्य ठेका कंपनियों में कार्यरत मजदूरों के कानूनी अधिकारों और शोषण मुक्ति के उपायों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत गेवरा बस्ती के मंगल भवन में किया गया। इस दौरान ठेका कामगारों को NCWA (राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता) से जोड़ने, उन्हें स्थायी करने की मांग तथा श्रमिक आंदोलनों को कुचलने की सरकारी नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

वर्कशॉप की अध्यक्षता ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने की।

मुख्य वक्ता एवं वक्ताओं ने रखी अपनी बात

हाई पावर कमेटी का विरोध, NCWA से जोड़ने की मांग

राष्ट्रीय कोल वर्कर फेडरेशन के महामंत्री भागवत दुबे ने अपने वक्तव्य में हाई पावर कमेटी के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे पार्लियामेंट द्वारा गठित नहीं किया गया है, अतः इसका कोई महत्व नहीं है।
दुबे ने पुरजोर मांग की कि ठेका कामगारों को NCWA (राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता) के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने जानकारी दी कि 2008 से 2015 के बीच खनन कार्यों में लगे मजदूरों को स्थायी करने का सरकारी आदेश जारी हुआ था। इस संबंध में मामला केंद्रीय लेबर कमिश्नर के पास दर्ज है, और जल्द ही मजदूरों के स्थायीकरण को लेकर निर्णय आने की उम्मीद है।

दुबे ने कहा कि “आउटसोर्सिंग मजदूरों की मजदूरी पर डाका है, इसे समाप्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने छत्तीसगढ़ के मजदूरों से अपने अधिकारों के लिए कानूनी जानकारी में दक्ष बनने का आह्वान किया।
साथ ही कहा कि हाई पावर कमेटी के अनुसार, ठेका कामगारों को स्थायी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन देना अनुचित है, जबकि वे उच्च कुशल कार्य कर रहे हैं।

श्रमिक आंदोलन को कुचलने की हो रही है कार्यवाही

कोल इंडिया एसटी-एससी एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.पी. खांडे ने कहा कि केंद्र सरकार श्रमिक आंदोलन को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि यूनियन बनाने के अधिकार को सीमित किया जा रहा है और आंदोलनों को कुचलने के लिए दमनात्मक कार्यवाही की जा रही है।

खांडे ने चेतावनी दी कि “यदि ठेका कामगारों की आवाज़ दबाई गई, तो केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।”
उन्होंने समान काम, समान वेतन और सुविधाओं की मांग को लेकर ठेका कर्मचारियों के आंदोलन को और मजबूत करने का आव्हान किया।

कोयला उत्खनन से जनजीवन और कृषि भूमि को खतरा

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सपुरन कुलदीप ने कहा कि कोरबा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कोयला और अन्य खनिज संपदाओं का अंधाधुंध उत्खनन गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि “खनन से न केवल जनजीवन प्रभावित हो रहा है बल्कि कृषि भूमि भी नष्ट हो रही है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के सामने भयावह संकट उत्पन्न होगा।

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