 मौलिक अधिकारों का सवाल : बिलासपुर में मसीही प्रार्थना करने पर प्रताड़ना का आरोप

 मौलिक अधिकारों का सवाल : बिलासपुर में मसीही प्रार्थना करने पर प्रताड़ना का आरोप

बिलासपुर, 6 अक्टूबर 2025।
संवैधानिक मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग को लेकर बिलासपुर जिले की ग्राम नवागांव धानी (सीपत) निवासी संध्या खारे (उम्र 20 वर्ष, पिता धनीराम खारे) सहित कई नागरिकों ने आज कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन सौंपा है।

आवेदन में नागरिकों ने कहा है कि वे बिना किसी दबाव, प्रलोभन या धर्म परिवर्तन के, केवल अपने मन की शांति, आस्था और विश्वास के लिए मसीही प्रार्थना सभाओं, चर्चों और सामुदायिक सांस्कृतिक सत्संगों में भाग लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब भी हिंदू धर्मावलंबी हैं, और यदि वे कभी धर्म परिवर्तन करना चाहें, तो वह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 और नियम 1969 के अंतर्गत ही होगी।

संध्या खाररे ने आरोप लगाया है कि कुछ विघ्नसंतोषी तत्व और उनके प्रभाव में आए प्रशासन व पुलिस के लोग, झूठे आरोप लगाकर उन्हें “धर्मांतरण करने वाला” बताकर मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आस्था की आज़ादी पर भी आघात है।

उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा —

> “हम लोग केवल अपने मन की शांति के लिए ईश्वर की प्रार्थना करते हैं। जैसे रसखान ने कृष्ण भक्ति की, जैसे आज विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक उत्सवों में भाग लेते हैं, वैसे ही हम भी अपने विश्वास के अनुरूप प्रार्थना करते हैं। परंतु कुछ लोग हमें झूठे आरोपों से डराने की कोशिश करते हैं।”

संध्या और उनके साथियों ने प्रशासन से निवेदन किया है कि —

ऐसे सामाजिक तत्वों पर रोक लगाई जाए,

और प्रशासन व पुलिस को संविधान की समानता, स्वतंत्रता और धार्मिक सहिष्णुता की भावना के अनुरूप कार्य करने के लिए निर्देशित किया जाए।

इन नागरिकों ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को धर्म मानने, मान्यता रखने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, और कोई भी शक्ति इस अधिकार को छीने, यह असंवैधानिक है।

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