बिलासपुर के 100 स्कूलों में किचन गार्डन की पहल, पढ़ाई के साथ खेती और पोषण के गुर सीख रहे बच्चे

बिलासपुर स्कूलों का किचन गार्डन अभियान

पालकों और ग्रामीणों की सहभागिता से संवर रहे स्कूल परिसर, बच्चों को मिल रही प्रकृति और पौष्टिक आहार की व्यावहारिक शिक्षा

बिलासपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के शासकीय स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ बच्चों को खेती-किसानी, पर्यावरण संरक्षण और पौष्टिक आहार का महत्व भी सिखाया जा रहा है। इसके लिए स्कूल परिसरों में किचन गार्डन विकसित किए जा रहे हैं। जिले के अब तक 100 शासकीय स्कूलों में किचन गार्डन तैयार किए जा चुके हैं। इस पहल के जरिए बच्चे किताबों में पढ़ी जानकारी को वास्तविक जीवन में समझने के साथ पौधों की देखभाल और सब्जियों के उत्पादन की प्रक्रिया भी सीख रहे हैं।

खाली जमीन बन रही हरियाली की पाठशाला

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स्कूलों की खाली जमीन पर विकसित किए जा रहे किचन गार्डन बच्चों के लिए सीखने का एक नया माध्यम बन रहे हैं। यहां स्थानीय मौसम और जलवायु के अनुकूल सब्जियां उगाई जा रही हैं। पर्याप्त भूमि और पानी की सुविधा वाले अन्य स्कूलों में भी किचन गार्डन विकसित करने का कार्य जारी है।

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें केवल शिक्षक और विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि शाला प्रबंधन समितियां, पालक और स्थानीय ग्रामीण भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भूमि तैयार करने से लेकर पौधरोपण और पौधों की नियमित देखभाल तक सामूहिक रूप से काम किया जा रहा है। इससे स्कूल परिसरों में हरियाली बढ़ने के साथ बच्चों में श्रम, सहयोग और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है।

किचन गार्डन में उग रहीं पौष्टिक हरी सब्जियां

स्कूलों में तैयार इन बगियाओं में मौसम के अनुसार विभिन्न प्रकार की सब्जियां लगाई जा रही हैं। इनमें लौकी, बरबटी, ग्वारफली, भिंडी, चेंचभाजी और अमारी भाजी प्रमुख हैं। वहीं, शीत ऋतु में पालक, मेथी, धनिया, बैंगन और सरसों भाजी जैसी सब्जियां भी उगाई जा रही हैं।

इन किचन गार्डन में उत्पादित सब्जियों का उपयोग बच्चों के भोजन में भी किया जा सकेगा। इससे उन्हें ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही, बच्चों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि संतुलित और पौष्टिक भोजन के लिए हरी सब्जियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।

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पदुमपारा स्कूल बना प्रेरणादायक उदाहरण

जिले के शासकीय प्राथमिक शाला पदुमपारा, संकुल सलका नवागांव में विकसित किचन गार्डन इस पहल का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। वर्ष 1996 में स्थापित इस विद्यालय में वर्ष 2023 से किचन गार्डन संचालित किया जा रहा है।

विद्यालय में अध्ययनरत 17 बालक और 15 बालिकाएं दो शिक्षकों के मार्गदर्शन में खेती-किसानी की बारीकियां सीख रहे हैं। बच्चे बीज बोने, पौधों की वृद्धि, उनकी देखभाल और सब्जियों के उत्पादन की प्रक्रिया को नजदीक से समझ रहे हैं। इस तरह विद्यालय की बगिया बच्चों के लिए केवल हरियाली का स्थान नहीं, बल्कि अनुभव के माध्यम से सीखने का केंद्र बन गई है।

किताबों से आगे बढ़कर प्रकृति से जुड़ रहे विद्यार्थी

किचन गार्डन के माध्यम से बच्चों को प्रकृति के करीब लाने का प्रयास किया जा रहा है। बीज से पौधा बनने, मौसम के अनुसार फसलों की वृद्धि और पौधों को नियमित पानी देने जैसी गतिविधियों से बच्चे प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

इससे उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता, पौष्टिक भोजन की समझ और खेती-किसानी के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद मिल रही है। साथ ही, सामूहिक रूप से बगिया की देखभाल करने से बच्चों को अनुशासन, परिश्रम और मिल-जुलकर काम करने का महत्व भी समझ में आ रहा है।

शिक्षा, पोषण और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की पहल

बिलासपुर जिले के शासकीय स्कूलों में विकसित किए जा रहे किचन गार्डन शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इससे स्कूल परिसर हरियाली से समृद्ध हो रहे हैं और बच्चों को प्रकृति, पोषण तथा कृषि के बारे में सीखने का अवसर मिल रहा है।

शिक्षकों, पालकों और ग्रामीणों की सहभागिता से विकसित हो रही ये बगियाएं बच्चों में मिट्टी से जुड़ाव, श्रम के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करने का माध्यम बन रही हैं। इस पहल के जरिए स्कूलों को पढ़ाई के साथ पोषण और प्रकृति की समझ विकसित करने वाले केंद्रों के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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