छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में अनियमितताओं की जांच की मांग, संजीव तिवारी को पद से हटाने का आग्रह

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प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने आयुक्त जनसंपर्क को सौंपा ज्ञापन, 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, पदस्थापना और स्थानांतरण संबंधी मामलों, शासकीय विज्ञापन एवं टेंडर प्रक्रिया तथा एक पुराने घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की छत्तीसगढ़ इकाई ने इस संबंध में आयुक्त जनसंपर्क को ज्ञापन सौंपकर अपर संचालक संजीव तिवारी के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच कराने और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।

संगठन की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन में मांग की गई है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही, जांच की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अपर संचालक संजीव तिवारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने अथवा अन्यत्र पदस्थ करने पर विचार किया जाए। संगठन ने जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की मांग भी की है।

30 वर्षों से अधिक की पदस्थापना और सेवा अभिलेखों की जांच की मांग

ज्ञापन में संजीव तिवारी की लंबे समय से चली आ रही पदस्थापना तथा उनकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने उनकी प्रथम नियुक्ति, नियुक्ति आदेश, संपूर्ण सेवा अभिलेख, पदस्थापना एवं स्थानांतरण नीति के अनुपालन की जांच कराने का आग्रह किया है।

इसके अतिरिक्त, वार्षिक आय घोषणा पत्रों और चल-अचल संपत्ति के विवरण का नियमानुसार परीक्षण करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इन बिंदुओं की जांच से संबंधित तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

9 अक्टूबर 2025 की घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग

ज्ञापन में 9 अक्टूबर 2025 को हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए उसकी संपूर्ण एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। संगठन ने घटना से संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का परीक्षण कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने का आग्रह किया है।

ज्ञापन के अनुसार, जांच में यदि किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष सामने आता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, ज्ञापन में उठाए गए आरोपों और मांगों पर विभागीय स्तर पर जांच तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शासकीय विज्ञापन और टेंडर प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाने की मांग

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी शासकीय विज्ञापनों, विज्ञापन आवंटन प्रक्रिया, निविदाओं, भुगतान तथा संबंधित वित्तीय लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

संगठन ने कहा है कि विज्ञापन आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, पारदर्शिता तथा निष्पक्षता के आधार पर संचालित होनी चाहिए। ज्ञापन में पिछले दो वर्षों के दौरान अपर संचालक संजीव तिवारी के कार्यकाल में जारी शासकीय विज्ञापनों एवं टेंडर से संबंधित मामलों की जानकारी और कथित अनियमितताओं की जांच का विवरण सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है।

15 दिनों के भीतर ATR सार्वजनिक करने की मांग

ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि शिकायत पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट यानी एटीआर (Action Taken Report) शिकायत प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक की जाए।

संगठन ने सुझाव दिया है कि रिपोर्ट जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेबसाइट अथवा किसी अन्य उपयुक्त सार्वजनिक माध्यम पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी आम नागरिकों और संबंधित पक्षों तक पहुंच सके।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों की अवधि में संपूर्ण जांच पूरी करना संभव न हो, तो प्रारंभिक कार्रवाई, जांच की वर्तमान स्थिति और आगामी कार्रवाई की समय-सीमा सहित एटीआर सार्वजनिक की जाए।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गई प्रतिलिपि

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और जनसंपर्क विभाग के सचिव सहित संबंधित सक्षम जांच अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने का उल्लेख है।

ज्ञापन पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मिश्रा का नाम अंकित है।

अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजरें

जनसंपर्क विभाग से जुड़े इन मुद्दों पर संगठन द्वारा निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग किए जाने के बाद अब संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, उपलब्ध दस्तावेज संगठन की ओर से प्रस्तुत शिकायत एवं मांगों को दर्शाता है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

अब देखना होगा कि जनसंपर्क विभाग इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और जांच की स्थिति तथा कार्रवाई का विवरण निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक किया जाता है या नहीं।

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