40 साल बाद भी रोजगार और पुनर्वास का इंतजार, SECL के खिलाफ भू-विस्थापितों का महासम्मेलन

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अंडीकछार में जुटे सुवाभोड़ी, सिरकी खुर्द, चैनपुर, झाबर और बेलटिकरी के ग्रामीण; रोजगार, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पारित किए गए अहम प्रस्ताव

दीपका/कोरबा। कोयला उत्पादन के लिए अपनी जमीन देने वाले भू-विस्थापित परिवार आज भी रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास जैसी बुनियादी मांगों को लेकर संघर्ष करने को मजबूर हैं। भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के लगभग 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होने से प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत अंडीकछार के टिनठिकिया स्थान पर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के बैनर तले विशाल भू-विस्थापित महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में दीपका क्षेत्र के प्रभावित गांवों सुवाभोड़ी, सिरकी खुर्द, चैनपुर, झाबर और बेलटिकरी के ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने हक और अधिकारों की मांग उठाई।

महासम्मेलन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लंबित मांगों के निराकरण, पुनर्वासित गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता तथा भू-विस्थापित परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न मांगों को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

सुवाभोड़ी के ग्रामीणों की लंबित मांगों पर जोर

महासम्मेलन में ग्राम सुवाभोड़ी के प्रभावित परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों के लंबित मुआवजे और परिसंपत्तियों का शीघ्र भुगतान करने, ₹5 लाख की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान करने तथा बसाहट पात्रता से संबंधित दस्तावेजों में नाम और जाति की त्रुटियों को तत्काल सुधारने की मांग की गई।

इसके अलावा स्थानीय युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने तथा प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों का लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण किया जाना चाहिए।

पुनर्वासित गांवों में मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा उठा

सम्मेलन में सिरकी खुर्द, चैनपुर, झाबर और बेलटिकरी सहित पुनर्वासित क्षेत्रों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने भूमि पट्टे आवंटित करने और बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने की मांग उठाई।

प्रस्तावों में पक्की सड़कें, नालियां, पुल-पुलिया, गार्डन, सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम, तालाब और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग शामिल रही। इसके साथ ही पुनर्वास नीति के अंतर्गत लंबित मुआवजे और अन्य पात्रताओं का पारदर्शी तरीके से निराकरण करने पर जोर दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन के बाद प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए। लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित प्रबंधन और प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

भू-विस्थापितों के स्वरोजगार और टेंडर सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव

महासम्मेलन में भू-विस्थापित परिवारों के स्वरोजगार और ठेकेदारी से जुड़े अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। समिति ने वैकल्पिक स्वरोजगार के लिए निर्धारित ₹5 लाख की टेंडर सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव रखा।

इसके साथ ही स्थानीय भू-विस्थापित ठेकेदारों के साथ कथित भेदभाव समाप्त करने और उन्हें समान अवसर प्रदान करने की मांग की गई। समिति का कहना है कि जिन परिवारों ने परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी है, उन्हें रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसरों में भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने किया एकजुटता का आह्वान

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने प्रभावित गांवों के निवासियों, माताओं-बहनों, बुजुर्गों और विशेष रूप से युवाओं से अपने हक और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वर्षों पहले अपनी जमीन देकर देश को रोशन करने में योगदान देने वाले किसान आज अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विस्थापन के दशकों बाद भी रोजगार, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का बने रहना गंभीर चिंता का विषय है।

कुलदीप ने कहा कि भू-विस्थापितों की समस्याओं की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महासम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय और प्रस्ताव पारित किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मंच के माध्यम से SECL प्रबंधन के खिलाफ आगामी आंदोलन और संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी।

लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग, आगे के आंदोलन की तैयारी

अंडीकछार में आयोजित इस महासम्मेलन के माध्यम से भू-विस्थापित परिवारों ने रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास, भूमि पट्टे, मूलभूत सुविधाओं और स्वरोजगार से जुड़े मुद्दों को फिर से प्रमुखता से उठाया है। सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के जरिए समिति ने प्रभावित परिवारों की मांगों के निराकरण पर जोर दिया।

अब देखना होगा कि SECL प्रबंधन और संबंधित प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में भू-विस्थापितों की लड़ाई को आगे और तेज किया जाएगा।

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