SECL गेवरा प्रबंधन के खिलाफ नरईबोध के ग्रामीणों में आक्रोश, 12 अक्टूबर से CGM कार्यालय घेराव की चेतावनी

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17 अप्रैल के त्रिपक्षीय समझौते पर अमल नहीं होने का आरोप, मांगें पूरी नहीं हुईं तो खदान बंद करने की दी चेतावनी

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गेवरा/कोरबा। एसईसीएल (SECL) गेवरा क्षेत्र में भू-विस्थापितों की मांगों और पूर्व में हुए समझौतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों को लेकर ग्राम नरईबोध के प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। पार्षद अमिला राकेश पटेल के नेतृत्व में आयोजित चर्चा-परिचर्चा के दौरान आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई और एसईसीएल प्रबंधन को अल्टीमेटम नोटिस सौंपा गया।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस एवं लिखित कार्रवाई नहीं की गई, तो 12 अक्टूबर 2026 से गेवरा स्थित मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकलने पर गेवरा कोयला खदान का कामकाज बंद करने की चेतावनी दी गई है।

त्रिपक्षीय बैठक में हुए समझौते पर अमल नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में भू-विस्थापितों की समस्याओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी थीं। बैठक से संबंधित संदर्भ पत्र क्रमांक 2843, दिनांक 18 अप्रैल 2026 का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समझौते में तय बिंदुओं पर अब तक कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुराने अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नए अधिकारियों के कार्यकाल में नौकरी, मुआवजा, प्लॉट आवंटन और पुनर्वास से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है। इससे प्रभावित किसानों और भूमिहीन परिवारों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे की मांग प्रमुख

ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों को सामने रखते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का निराकरण किया जाना चाहिए। इनमें प्रमुख रूप से निम्न मांगें शामिल हैं—

1. जरहाजेल बसाहट स्थल का विकास: पुनर्वास स्थल का शीघ्र समतलीकरण, प्लॉटों का चिह्नांकन और पात्र हितग्राहियों को प्लॉट आवंटित किया जाए।

2. रोजगार एवं मुआवजा: पात्र प्रभावितों को एकमुश्त मुआवजा राशि जारी की जाए तथा रोजगार के लिए पात्रता सूची पारदर्शी तरीके से प्रकाशित की जाए।

3. छोटे खातेदारों एवं भूमिहीन परिवारों को राहत: छोटे खातेदारों और भूमिहीन परिवारों के लिए पुनर्वास राशि तथा रोजगार संबंधी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि इन महत्वपूर्ण मांगों पर अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है।

दो चरणों में आंदोलन की तैयारी

बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से दो चरणों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

पहला चरण: 12 अक्टूबर 2026 से एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि 17 अप्रैल 2026 को हुए त्रिपक्षीय समझौते के बिंदुओं पर तत्काल लिखित और पारदर्शी कार्रवाई शुरू की जाए।

दूसरा चरण: यदि पहले चरण के आंदोलन के बाद भी प्रबंधन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं की जाती है, तो ग्रामीण गेवरा कोयला खदान का कामकाज बंद करने के लिए आंदोलन तेज करेंगे।

प्रबंधन और प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति, कानून-व्यवस्था की समस्या अथवा आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

फिलहाल, नरईबोध के प्रभावित ग्रामीणों की निगाहें एसईसीएल प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि 12 अक्टूबर से प्रस्तावित आंदोलन से पहले प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों पर कोई ठोस पहल करता है या यह विवाद आगे और गहराता है।

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