नर्सिंग संवर्ग की ग्रेड पे बढ़ाने की मांग तेज, प्रदेशभर में ज्ञापन अभियान

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30 अक्टूबर को राजधानी में महारैली की चेतावनी, दीपावली तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग की वर्षों से लंबित मांगों और वेतन विसंगति को लेकर एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन के आह्वान पर 7 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर में ज्ञापन अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न जिलों और ब्लॉक मुख्यालयों में नर्सिंग कर्मचारियों ने भोजन अवकाश के दौरान प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

एसोसिएशन के अनुसार प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत नियमित स्टाफ नर्स एवं नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों ने अभियान में भाग लिया। कर्मचारियों ने लंबे समय से लंबित ग्रेड पे बढ़ाने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कराया।

भोजन अवकाश में प्रदर्शन, अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

संगठन के आह्वान पर नर्सिंग कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों के बाहर भोजन अवकाश के दौरान एकत्र हुए और मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला एवं ब्लॉक स्तर पर संस्था प्रमुख, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, जिला कलेक्टर, खंड चिकित्सा अधिकारी एवं एसडीएम सहित संबंधित अधिकारियों को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

एसोसिएशन का कहना है कि यह अभियान सरकार को नर्सिंग संवर्ग की वर्षों पुरानी मांगों और वेतन विसंगति से अवगत कराने के उद्देश्य से किया गया है। संगठन ने विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य विभाग के सचिव तथा संचालक संजीव झा को भी ज्ञापन सौंपकर ग्रेड पे बढ़ाने का अनुरोध किया है।

2018 के आंदोलन और कमेटी की अनुशंसाओं का हवाला

प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा के अनुसार ग्रेड पे में वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर वर्ष 2018 में नर्सिंग संवर्ग द्वारा आंदोलन किया गया था। संगठन का दावा है कि उस दौरान कई नर्सिंग कर्मचारियों को गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

एसोसिएशन के मुताबिक आंदोलन के बाद शासन स्तर पर नर्सिंग संवर्ग की मांगों के निराकरण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। संगठन का दावा है कि कमेटी ने ग्रेड पे बढ़ाने को लेकर अनुशंसाएं भी की थीं, लेकिन करीब आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी उन अनुशंसाओं को लागू नहीं किया गया।

नर्सिंग संगठन का कहना है कि इस दौरान मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से मांगों से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।

दूसरे राज्यों और केंद्र के समान वेतन की मांग

एसोसिएशन ने अपने मांगपत्र में कहा है कि अन्य निकटवर्ती राज्यों तथा केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में छत्तीसगढ़ के स्टाफ नर्सों का वेतन अपेक्षाकृत कम है। संगठन ने वर्ष 2018 में गठित कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर ग्रेड पे में वृद्धि करने की मांग की है।

2023 के आंदोलन का भी दिया हवाला

नर्सेस एसोसिएशन ने वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया है। संगठन का दावा है कि उस आंदोलन के बाद भी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हुआ और 2500 से अधिक कर्मचारियों को निलंबन एवं बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

एसोसिएशन का कहना है कि लगातार लंबित मांगों के कारण नर्सिंग संवर्ग में असंतोष बढ़ रहा है।

30 अक्टूबर को राजधानी में महारैली का ऐलान

प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि 7 अक्टूबर के ज्ञापन अभियान के जरिए सरकार को एक बार फिर नर्सिंग संवर्ग की मांगों से अवगत कराया गया है। यदि इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो 30 अक्टूबर 2026 को राजधानी में प्रदेशव्यापी महारैली और धरना आयोजित किया जाएगा।

संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि दीपावली तक मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

आंदोलन लंबा चला तो स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की चेतावनी

नर्सिंग संगठन ने शासन-प्रशासन को दिए सूचना पत्र में कहा है कि मांगों की लगातार अनदेखी से प्रदेशभर के नर्सिंग कर्मचारी निराश और आक्रोशित हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप लेता है तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

एसोसिएशन के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

अब 7 अक्टूबर को हुए प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान के बाद सरकार नर्सिंग संवर्ग की वर्षों पुरानी ग्रेड पे वृद्धि और वेतन विसंगति दूर करने की मांग पर क्या रुख अपनाती है, यह महत्वपूर्ण होगा। वहीं 30 अक्टूबर की प्रस्तावित महारैली से पहले शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय होता है या नहीं, इस पर भी नर्सिंग कर्मचारियों की नजर बनी हुई है।

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