अंबिकापुर में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ FIR, आदिवासी समाज को लेकर कथित टिप्पणी का मामला

img 20261006 wa0297

अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से जुड़ा विवाद फिर सुर्खियों में, पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर बयान का आरोप

अंबिकापुर। अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से जुड़ा विवाद अब एक और कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक सार्वजनिक टिप्पणी और अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित अपमानजनक बयान के मामले में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ पुलिस ने FIR क्रमांक 0015/2026 दर्ज की है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत विभिन्न धाराएं लगाई हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सुनीता सोनहा सहित विभिन्न संगठनों की ओर से 15 सितंबर को पुलिस के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के दौरान रवीन्द्र तिवारी ने अनुपम वस्त्रालय प्रकरण की पीड़िता के संबंध में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की तथा एक अन्य कथित घटना का उल्लेख किया।

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित घटना की सत्यता पर सवाल उठाते हुए पुलिस से संबंधित थाने के अभिलेखों से इसकी पुष्टि कराने की मांग की थी।

आदिवासी समाज को लेकर कथित टिप्पणी का भी आरोप

शिकायत में अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बयान से आदिवासी समाज की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और इसे अपमानजनक माना गया। इसी आधार पर पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज की महिला प्रकोष्ठ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी कार्रवाई की मांग उठाई गई थी।

FIR में SC/ST एक्ट और BNS की धाराएं

पुलिस द्वारा दर्ज FIR क्रमांक 0015/2026 में SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(u), 3(1)(w)(ii) और 3(2)(va) के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और 353(2) का उल्लेख किया गया है।

इन धाराओं के तहत सार्वजनिक रूप से अपमान या अनादर, विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता या वैमनस्य को बढ़ावा देने तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य के विरुद्ध निर्धारित अपराधों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

अनुपम वस्त्रालय प्रकरण पहले से विवादों में

अनुपम वस्त्रालय से जुड़ा मूल विवाद अंबिकापुर के स्कूल रोड क्षेत्र की घटना के बाद सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 11 अगस्त 2026 की घटना के संबंध में सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 0563/2026 के तहत BNS की धारा 74 एवं 351(3) में मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद पीड़िता के पक्ष में न्याय की मांग तथा मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे कथित बयानों को लेकर सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया।

भाजपा नेता धीरज सिंह पर भी अलग FIR

इसी विवाद से जुड़े घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता धीरज सिंह के खिलाफ भी अंबिकापुर पुलिस ने FIR क्रमांक 0702/2026 दर्ज की है।

FIR के अनुसार, कलेक्ट्रेट मैदान के पीछे गेट के पास कथित गाली-गलौज, जातिगत टिप्पणी और धमकी देने के मामले में शिकायतकर्ता आकांक्षा टोप्पो की शिकायत पर धीरज सिंह के खिलाफ BNS की धारा 296, 351(1), 78(1) तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r-s) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

थाने में कथित बर्ताव को लेकर भी उठे सवाल

पूरे मामले के दौरान पुलिस कार्रवाई और आरोपियों से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी कई तरह के आरोप सामने आए हैं। रवीन्द्र तिवारी और धीरज सिंह से जुड़े प्रकरणों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।

पुलिस जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य

FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस विवेचना में कथित बयानों की वास्तविकता, उनके संदर्भ, उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी। संबंधित पक्षों के बयान भी जांच का हिस्सा होंगे।

महत्वपूर्ण है कि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फिलहाल रवीन्द्र तिवारी और धीरज सिंह के खिलाफ दर्ज अलग-अलग FIR के बाद अंबिकापुर का अनुपम वस्त्रालय प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस जांच की दिशा और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर अब सबकी नजर बनी हुई है।

Advertisement 1
Advertisement 2
Advertisement 3

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *