खसरा नंबर 102 की 1 डिसमिल जमीन के फर्जी फौती नामांतरण का आरोप, जांच और निरस्तीकरण की मांग

addtext 10 06 08.46.45

बिलासपुर/रतनपुर। ग्राम नवागांव (महोदा), तहसील रतनपुर में खसरा नंबर 102 की 1 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में ग्राम नवागांव निवासी राजेन्द्र साहू, पिता रामेश्वर प्रसाद साहू ने कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रतनपुर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर कथित तौर पर किए गए फर्जी फौती नामांतरण को निरस्त करने और संबंधित मामले की जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में राजेन्द्र साहू ने बताया है कि ग्राम नवागांव (महोदा) स्थित खसरा नंबर 102 में 1 डिसमिल जमीन उनके पिता रामेश्वर प्रसाद साहू को वर्ष 1987-88 के पारिवारिक बंटवारे के दौरान प्राप्त हुई थी। आवेदक के अनुसार यह जमीन वर्ष 2004-05 तक बी-1 में उनके पिता के नाम दर्ज थी।

2004-05 के बाद रिकॉर्ड बदलने का आरोप

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004-05 के बाद उक्त जमीन अचानक रिकॉर्ड से हटकर देवमती पति चंद्रिका प्रसाद के नाम दर्ज हो गई, जबकि आवेदक का दावा है कि देवमती का उक्त जमीन से कोई संबंध नहीं था।

राजेन्द्र साहू के मुताबिक देवमती की मृत्यु के करीब 7-8 वर्ष बाद चंद्रिका प्रसाद, पिता वेद प्रसाद, निवासी नवागांव महोदा द्वारा उक्त 1 डिसमिल जमीन का फौती नामांतरण अपने नाम कराने के लिए आवेदन लगाया गया। आवेदनकर्ता ने इस प्रक्रिया को नियम विरुद्ध बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

आपत्ति के बावजूद नामांतरण का आरोप

आवेदन में यह भी उल्लेख है कि आवेदक ने तहसील कार्यालय रतनपुर में लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया था कि संबंधित जमीन उनके पूर्वजों की है और देवमती अथवा चंद्रिका प्रसाद का इससे संबंध नहीं है।

आवेदक का आरोप है कि आपत्ति दर्ज होने के बावजूद तहसील कार्यालय द्वारा मामले को रोकने के बजाय चंद्रिका प्रसाद के नाम फौती नामांतरण कर दिया गया। इसे आवेदक ने सरासर गलत और कानून के विपरीत बताया है।

तीन प्रमुख मांगों के साथ सौंपा आवेदन

राजेन्द्र साहू ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली, खसरा नंबर 102 की 1 डिसमिल जमीन पर चंद्रिका प्रसाद द्वारा कराए गए फौती नामांतरण की पूरी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि देवमती की मृत्यु के 7-8 साल बाद फौती की प्रक्रिया किस आधार पर हुई।

दूसरी, आवेदक द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति के बावजूद फौती नामांतरण किए जाने के मामले में संबंधित कर्मचारी/पटवारी की भूमिका की जांच की जाए।

तीसरी, चंद्रिका प्रसाद के नाम किए गए कथित फर्जी फौती नामांतरण को तत्काल निरस्त कर उक्त जमीन को आवेदक के पिता रामेश्वर प्रसाद साहू अथवा संबंधित वास्तविक हकदार के नाम पुनः दर्ज किए जाने की मांग की गई है।

दस्तावेजी रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकता है पूरा मामला

राजस्व मामलों में जमीन के स्वामित्व, बंटवारे और नामांतरण से जुड़े विवादों में मूल खसरा, बी-1, नामांतरण आदेश, मृत्यु प्रमाण-पत्र, वारिसान संबंधी दस्तावेज और तहसील रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में इस मामले में भी यदि प्रशासन द्वारा पुराने राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण प्रक्रिया की जांच की जाती है, तो 2004-05 के बाद रिकॉर्ड में हुए बदलाव और बाद में किए गए फौती नामांतरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल आवेदनकर्ता ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने और कथित गलत नामांतरण को निरस्त करने की मांग की है। आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

Advertisement 1
Advertisement 2
Advertisement 3

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *