बिलासपुर में ई-रिक्शा चालकों की परेशानी बढ़ी, कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

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रैपिडो ऐप के माध्यम से काम करने वाले चालकों ने किराया, अकाउंट और तकनीकी समस्याओं के समाधान की उठाई मांग

बिलासपुर। शहर में ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले चालकों की समस्याएं अब प्रशासन तक पहुंच गई हैं। ई-ऑटो रिक्शा चालक संघ, बिलासपुर ने जिला कलेक्टर को सामूहिक आवेदन सौंपकर रैपिडो ऐप के माध्यम से कार्य करने वाले ई-रिक्शा चालकों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की है।

संघ ने आवेदन में कहा है कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक रैपिडो ऐप के माध्यम से यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। कई चालक इसी कार्य को अपने परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बनाए हुए हैं। इसके बावजूद ऐप की व्यवस्था और कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्याओं के कारण चालकों को लंबे समय से आर्थिक नुकसान, परेशानी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

आर.सी. के अनुसार अलग श्रेणी निर्धारित करने की मांग

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ई-ऑटो रिक्शा चालक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि ई-रिक्शा चालकों की वास्तविक वाहन श्रेणी के अनुसार रैपिडो ऐप में उचित श्रेणी निर्धारित की जाए। संघ का कहना है कि श्रेणी निर्धारण में विसंगति के कारण चालकों को उनके वाहन और सेवा के अनुरूप उचित किराया नहीं मिल पा रहा है।

इसके साथ ही संघ ने उचित किराया निर्धारित करने और यात्रियों से लिए जाने वाले किराये के अनुरूप चालकों को भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। चालकों ने ऐप से संबंधित तकनीकी समस्याओं के तत्काल निराकरण की भी मांग रखी है।

बिना जांच अकाउंट बंद नहीं करने की मांग

संघ ने सबसे गंभीर समस्या के रूप में चालकों के रैपिडो अकाउंट को बिना उचित जांच के बंद किए जाने का मुद्दा उठाया है। आवेदन में कहा गया है कि यदि किसी चालक का अकाउंट बंद किया जाता है तो पहले मामले की उचित जांच की जाए और चालक को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।

इसके अलावा अकाउंट दोबारा सक्रिय करने के नाम पर चालकों से राशि की मांग नहीं किए जाने की मांग भी संघ ने की है।

स्थानीय प्रतिनिधि को कई बार बताई समस्याएं

आवेदन में संघ ने बताया कि इन समस्याओं के संबंध में रैपिडो के स्थानीय प्रतिनिधि रमन सिंह को कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर तथा मौखिक रूप से अवगत कराया गया। संघ के अनुसार इसके बावजूद समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

संघ ने यह भी बताया कि रैपिडो को 12 अगस्त 2026 को विधिवत कानूनी नोटिस दिया गया था। इसके बाद 22 अगस्त 2026 को व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उक्त नोटिस भेजा गया। संघ का दावा है कि इसके बावजूद आवेदन दिए जाने तक न तो नोटिस का जवाब मिला और न ही समस्याओं के समाधान को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।

कलेक्टर से हस्तक्षेप की उम्मीद

ई-ऑटो रिक्शा चालक संघ ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए रैपिडो की कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्याओं की जांच कराने तथा चालकों को राहत दिलाने की मांग की है। संघ का कहना है कि ई-रिक्शा चालक शहर की परिवहन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनकी रोजी-रोटी सीधे तौर पर इस व्यवस्था से जुड़ी है।

ऐसे में किराया, तकनीकी दिक्कत, अकाउंट बंद होने और अकाउंट पुनः सक्रिय करने के नाम पर राशि मांगे जाने जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर उचित समाधान किया जाना जरूरी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित कंपनी की ओर से ई-रिक्शा चालकों की इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

नोट: उपरोक्त समाचार आवेदन में लगाए गए आरोपों/दावों के आधार पर तैयार किया गया है। रैपिडो या संबंधित प्रतिनिधि का पक्ष आवेदन में उपलब्ध नहीं है; निष्पक्ष प्रकाशन के लिए उनका पक्ष मिलने पर उसे भी शामिल किया जाना उचित होगा।

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