गांधी जयंती पर हथियारों के प्रदर्शन की शिकायत, IG से जांच और कार्रवाई की मांग

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सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अभय नारायण पांडेय ने सरगुजा रेंज IG को सौंपा शिकायत पत्र, नाबालिग के हाथ में हथियार होने का भी दावा

अंबिकापुर। गांधी जयंती के दिन जहां देशभर में महात्मा गांधी के अहिंसा और शांति के संदेश को याद किया गया, वहीं अंबिकापुर में सोशल मीडिया पर कथित रूप से हथियारों के प्रदर्शन से जुड़ा मामला सामने आया है। समाजसेवी अभय नारायण पांडेय ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में अधिवक्ता संजय अंबष्ट के फेसबुक अकाउंट पर कथित तौर पर अपलोड की गई कुछ तस्वीरों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन तस्वीरों में अलग-अलग मौकों पर आग्नेयास्त्रों और अन्य हथियारों के साथ तस्वीरें दिखाई देती हैं। इनमें एक नाबालिग बच्चे के हथियार के साथ दिखाई देने वाली तस्वीरों का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।

AK-पैटर्न राइफल और अन्य हथियारों की जांच की मांग

शिकायतकर्ता के अनुसार, 5 जनवरी 2015 की एक तस्वीर में संजय अंबष्ट एक AK-पैटर्न राइफल जैसी दिखाई देने वाली बंदूक के साथ नजर आते हैं। शिकायत में इस हथियार की वास्तविक प्रकृति, उसकी वैधता और उसके स्रोत की विशेषज्ञ जांच कराने की मांग की गई है।

इसी तरह 21 फरवरी 2015 की एक अन्य तस्वीर में पिस्तौल जैसी दिखाई देने वाली वस्तु के साथ तस्वीर होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित हथियार के स्वामित्व, लाइसेंस और वैधता की जांच की मांग की है।

इसके अलावा 25 जून 2017 की एक तस्वीर में स्कोप लगी लंबी राइफल दिखाई देने का उल्लेख करते हुए उसके स्रोत और लाइसेंस का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

नाबालिग के हाथ में शॉटगन और तलवार होने का आरोप

शिकायत में सबसे गंभीर बिंदुओं में से एक 7 अक्टूबर 2015 की कथित सोशल मीडिया तस्वीर को बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसमें संजय अंबष्ट का नाबालिग पुत्र लंबी बैरल वाली शॉटगन/बंदूक के साथ दिखाई देता है। शिकायत में तस्वीर के साथ कथित रूप से पोस्ट किए गए कैप्शन का भी उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा 28 जुलाई 2018 की एक अन्य तस्वीर में नाबालिग के हाथ में तलवार जैसी धारदार वस्तु दिखाई देने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता ने इन सभी तस्वीरों की सत्यता, हथियारों की वास्तविक प्रकृति, उनके लाइसेंस तथा तस्वीरों की परिस्थितियों की जांच कराने की मांग की है।

आर्म्स एक्ट और JJ एक्ट के तहत जांच की मांग

शिकायत पत्र में आर्म्स एक्ट, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से धारा 3, 7, 9 और 25 सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच का आग्रह किया है।

इसके साथ ही नाबालिग को कथित रूप से हथियार उपलब्ध कराए जाने की परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन लागू जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत भी जांच की मांग की गई है।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया तस्वीरों की वास्तविकता तथा उनमें दिखाई देने वाले हथियारों की कानूनी स्थिति की पुष्टि पुलिस जांच और विशेषज्ञ परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का दावा

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट और तस्वीरों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य तथा मेटाडेटा सुरक्षित रखे गए हैं। इन्हें जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त कर पोस्ट की तारीख, समय और प्रामाणिकता का सत्यापन कराया जा सकता है।

अब पुलिस कार्रवाई पर नजर

मामला पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष पहुंचने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की किस स्तर पर जांच करती है और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले कथित हथियार वास्तविक, लाइसेंसी या प्रतिबंधित श्रेणी के हैं अथवा नहीं।

शिकायतकर्ता ने मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में कानून का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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