अंबिकापुर में इलाज के नाम पर लाखों की वसूली और लापरवाही का आरोप, श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत

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आयुष्मान कार्ड के बावजूद 6-7 लाख रुपये लेने का आरोप, इलाज के दौरान युवक की मौत; मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने पर भी उठे सवाल

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक 24 वर्षीय युवक की मौत का मामला सामने आया है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही, आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद लाखों रुपये की कथित वसूली तथा मौत के बाद मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

सड़क हादसे के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती

शिकायत के अनुसार सुभाषनगर निवासी 24 वर्षीय आशुतोष दास को 13 जून 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद श्री महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज के नाम पर नगद और ऑनलाइन माध्यम से करीब 6 से 7 लाख रुपये लिए गए।

परिजनों ने इस राशि को अवैध वसूली बताते हुए पूरे भुगतान और इलाज की प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

फेफड़ों में गंभीर संक्रमण होने का आरोप

परिजनों के मुताबिक 11 अगस्त को आशुतोष को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। इसके बाद 30 अगस्त को उसे दोबारा जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इलाज और देखभाल में कथित लापरवाही के कारण मरीज के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण फैल गया और Lung Abscess की स्थिति उत्पन्न हुई।

परिजनों का यह भी आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर शैलेन्द्र गुप्ता को बुलाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से आग्रह किया, लेकिन उनकी मांग पर तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप नहीं किया गया।

ट्रैकियोस्टमी ट्यूब निकालने पर भी सवाल

शिकायत के मुताबिक 2 सितंबर को मरीज की स्थिति का कथित तौर पर सही आकलन किए बिना उसकी Tracheostomy Tube निकाल दी गई। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी।

इसके बाद 3 सितंबर की रात करीब 11 बजे मरीज को रायपुर रेफर करने की बात कही गई। परिजनों का आरोप है कि रेफर करने की प्रक्रिया और सीटी स्कैन सहित अन्य औपचारिकताओं में कई घंटे लग गए और सुबह करीब 5:30 बजे मरीज को रायपुर के लिए रवाना किया गया। गंभीर हालत में रेफर किए गए आशुतोष की रास्ते में ही मौत हो गई।

मेडिकल रिकॉर्ड नहीं देने का भी आरोप

मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से सीटी स्कैन की सीडी अथवा फिल्म, एक्स-रे, ट्रांसफर समरी और डेथ समरी समेत उपचार से संबंधित दस्तावेज मांगे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया और केवल अधूरी केस शीट दी गई।

परिजनों ने आशंका जताई है कि मेडिकल रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या महत्वपूर्ण दस्तावेजों को हटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

कलेक्टर, एसपी और CMHO से जांच की मांग

मामले में शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है।

शिकायत में अस्पताल के मूल मेडिकल रिकॉर्ड, सीटी स्कैन, एक्स-रे, उपचार संबंधी दस्तावेज, ट्रांसफर समरी और डेथ समरी को सुरक्षित रखने अथवा जब्त करने की मांग भी की गई है, ताकि जांच के दौरान किसी भी साक्ष्य के प्रभावित होने की आशंका न रहे।

FIR और कार्रवाई की मांग

परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही, आयुष्मान कार्ड के बावजूद कथित अतिरिक्त वसूली तथा मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने के आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई एवं FIR दर्ज करने की मांग की है।

अब इस मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मरीज की मौत के लिए किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या अन्य अनियमितता जिम्मेदार थी या नहीं।

नोट: अस्पताल प्रबंधन अथवा संबंधित चिकित्सकों का पक्ष इस रिपोर्ट तैयार किए जाने तक उपलब्ध नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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