अम्बिकापुर। अनुपम वस्त्रालय, अम्बिकापुर में अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला द्वारा लगाए गए कथित दुष्कर्म के आरोपों को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में है। भारत मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ सहित सहयोगी संगठनों ने पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावरहित जांच की मांग की है।
संगठन ने आवेदन में वास्तविक आरोपी की पहचान सुनिश्चित करने, पीड़िता के कथित चरित्रहनन से जुड़े बयानों की जांच करने और जांच को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास की पड़ताल करने की मांग की है।
11 अगस्त की घटना का उल्लेख
आवेदन के अनुसार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला 11 अगस्त 2026 को स्कूल रोड, अम्बिकापुर स्थित अनुपम वस्त्रालय में कपड़ा खरीदने गई थीं। पीड़िता के आरोप के मुताबिक दुकान के भीतर उनके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया गया।
इस संबंध में सिटी कोतवाली अम्बिकापुर में अपराध क्रमांक 0563/2026 दर्ज होने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।
आरोपी की पहचान को लेकर उठाए सवाल
भारत मुक्ति मोर्चा ने आवेदन में आरोपी की पहचान को लेकर कथित विसंगति का मुद्दा उठाया है। संगठन के अनुसार पीड़िता द्वारा वास्तविक आरोपी का नाम कौशल केडिया बताए जाने की बात कही गई है, जबकि एफआईआर में रोशन केडिया का नाम दर्ज होने का उल्लेख है।
संगठन ने इस बिंदु की स्वतंत्र जांच कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक आरोपी की पहचान सुनिश्चित करने और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में प्रारंभिक विवेचना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का दावा है कि पीड़िता के कथन, आरोपी की पहचान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को उचित तरीके से दर्ज नहीं किया गया तथा पीड़िता के कथन को प्रभावित करने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि शिकायत के बाद प्रथम विवेचक के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हुई थी।
कथित सार्वजनिक बयान की भी जांच की मांग
मामले में रवीन्द्र तिवारी द्वारा पीड़िता के संबंध में कथित रूप से दिए गए सार्वजनिक बयान को लेकर भी संगठन ने जांच की मांग की है। आवेदन में पीड़िता के संबंध में शंकरगढ़ थाने में पूर्व में इसी प्रकार के कृत्य का आरोप लगाए जाने की बात कही गई है।
संगठन ने कहा है कि यदि पीड़िता के संबंध में किए गए दावे तथ्यहीन पाए जाते हैं, तो उनके माध्यम से पीड़िता की प्रतिष्ठा और शिकायत की विश्वसनीयता प्रभावित करने का प्रयास हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
CCTV और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने की मांग
संगठन ने अनुपम वस्त्रालय और आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों के फुटेज, DVR/NVR रिकॉर्डिंग, मोबाइल एवं कॉल रिकॉर्ड सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है।
आवेदन में इन साक्ष्यों की वैधानिक प्रक्रिया के तहत चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखने तथा कथित सार्वजनिक बयान से संबंधित मूल वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित कर उसकी सत्यता की जांच कराने की मांग भी की गई है।
इसके साथ ही शंकरगढ़ थाने के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि पीड़िता के संबंध में पूर्व में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज हुई थी या नहीं।
एसटी समुदाय को लेकर कथित टिप्पणी की जांच
आवेदन में अनुसूचित जनजाति समुदाय के संबंध में की गई कथित टिप्पणी और पीड़िता की एसटी पहचान जानते हुए कथित अपमान एवं चरित्रहनन की भी जांच की मांग की गई है।
संगठन ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत मामले के आवश्यक तत्वों की जांच कर, यदि आरोपों में अपराध के तत्व पाए जाते हैं, तो वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारी से विवेचना कराने की मांग
भारत मुक्ति मोर्चा ने अपराध क्रमांक 0563/2026 की विवेचना किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की है। साथ ही पीड़िता का विस्तृत पूरक अथवा पुनः कथन विधिसम्मत तरीके से दर्ज करने और प्रारंभिक विवेचना में छूटे महत्वपूर्ण तथ्यों को जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
संगठन ने पीड़िता के कथन के साथ चिकित्सकीय, भौतिक, परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले में लागू सभी वैधानिक धाराओं की समीक्षा करने की मांग की है। आवेदन में बीएनएस की धारा 63 और 64 का भी उल्लेख किया गया है।
जांच प्रभावित करने के प्रयास पर कार्रवाई की मांग
आवेदन में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान आरोपी अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पीड़िता या गवाहों पर दबाव बनाने, धमकी देने, साक्ष्यों को प्रभावित करने या विवेचना में हस्तक्षेप करने का प्रयास सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पृथक वैधानिक कार्रवाई की जाए।
संगठन का कहना है कि मामला अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। ऐसे में पीड़िता की सुरक्षा एवं गरिमा, साक्ष्यों का संरक्षण और निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
वामन मेश्राम से भी सहयोग की मांग
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पीड़िता ने भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम से न्याय की लड़ाई में सहयोग और मदद की गुहार लगाते हुए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया है।
भारत मुक्ति मोर्चा और सहयोगी संगठनों ने पुलिस अधिकारियों से मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों के संरक्षण और जांच में आरोपों के आवश्यक तत्व पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
संगठन ने यह भी कहा है कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वह लोकतांत्रिक एवं वैधानिक माध्यमों से उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करेगा।

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