अनुपम वस्त्रालय प्रकरण: पीड़िता के चरित्र हनन और जातिगत टिप्पणी के आरोपों पर सर्व आदिवासी समाज का हल्लाबोल, निष्पक्ष जांच और FIR की मांग

img 20260916 wa0033

अंबिकापुर, सरगुजा | अनुपम वस्त्रालय प्रकरण में कथित यौन दुर्व्यवहार की शिकार आदिवासी महिला को न्याय दिलाने और उसके खिलाफ की गई कथित बयानबाजी के विरोध में सर्व आदिवासी समाज (महिला प्रकोष्ठ) ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा ने थाना प्रभारी (आजा/जजा थाना), अंबिकापुर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस जांच पर उठाए सवाल

ज्ञापन के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को अंबिकापुर के स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय में एक आदिवासी महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना हुई थी। इस मामले में थाना सिटी कोतवाली, अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0563/2026 के तहत BNS की धारा 74 और 351(3) में मामला दर्ज किया गया।

समाज का आरोप है कि प्रारंभिक विवेचना के दौरान आरोपी की सही पहचान, पीड़िता के पूरे बयान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को उचित रूप से शामिल नहीं किया गया। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रारंभिक विवेचक के निलंबन के बाद भी पीड़िता का पूरक कथन अब तक विधिवत दर्ज नहीं किया गया है और आवश्यक धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं।

रवीन्द्र तिवारी पर गंभीर आरोप

सर्व आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि CAIT सरगुजा के उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी और उनके साथियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर मामले को समाप्त करने का दबाव बनाया। समाज का यह भी आरोप है कि सार्वजनिक रूप से पीड़िता के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक बयान दिए गए और आदिवासी समुदाय के संबंध में ऐसी टिप्पणियां की गईं जिन्हें समाज ने चरित्र हनन और पूरे जनजातीय समाज का अपमान बताया।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

समाज ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • शंकरगढ़ थाने से कथित पूर्व रिकॉर्ड का आधिकारिक सत्यापन कराया जाए।
  • संबंधित बयानों के वीडियो, ऑडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर जांच की जाए।
  • जातिगत टिप्पणी के आरोपों की जांच कर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाए।
  • पीड़िता का पूरक कथन दर्ज कर आवश्यक कानूनी धाराएं जोड़ी जाएं।
  • पीड़िता और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • वास्तविक आरोपी के खिलाफ शीघ्र वैधानिक कार्रवाई की जाए।

आंदोलन की चेतावनी

सर्व आदिवासी समाज ने कहा है कि यदि मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण हुंकार रैली आयोजित करेगा।

Advertisement 1
Advertisement 2
Advertisement 3

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *