जिला अस्पताल के आसपास निजी पैथोलॉजी, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों के संचालन पर उठे सवाल, कार्रवाई कब?

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सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को निजी जांच और इलाज के लिए भेजे जाने के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

सूरजपुर। जिला अस्पताल सूरजपुर के आसपास संचालित निजी पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी सेंटर और निजी क्लीनिकों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले कुछ मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद निजी जांच केंद्रों और क्लीनिकों में जाने की सलाह दी जाती है।

स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार, जिला अस्पताल के आसपास कई निजी पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों में मरीजों की भीड़ भी देखी जाती है। आरोप लगाने वाले मरीजों का कहना है कि जांच और उपचार के नाम पर उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं।

कमीशन के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

मामले में कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल से मरीजों को निजी जांच केंद्रों या क्लीनिकों में भेजे जाने के पीछे कमीशन का खेल हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में यह सामने आता है कि जिला अस्पताल में पदस्थ किसी कर्मचारी या चिकित्सक द्वारा मरीजों को किसी निजी संस्थान में अनावश्यक रूप से भेजा जा रहा है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकारी अस्पताल की सुविधाओं पर भी उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिला अस्पताल में संबंधित जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है, तो मरीजों को निजी संस्थानों में जाने की सलाह क्यों दी जाती है?

वहीं, यदि जिला अस्पताल में सभी आवश्यक जांच, दवाइयां या उपचार सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं, तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए, ताकि मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

200 मीटर के दायरे में निजी संस्थानों के संचालन की जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला अस्पताल के आसपास निर्धारित दूरी के भीतर संचालित निजी पैथोलॉजी, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों को लेकर भी जांच की मांग की है।

प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि अस्पताल के आसपास संचालित इन संस्थानों के पास आवश्यक पंजीयन, अनुमति, तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता और अन्य वैधानिक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।

साथ ही, यदि किसी नियम के तहत अस्पताल के आसपास निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन को लेकर दूरी अथवा अन्य शर्तें निर्धारित हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा मौके पर निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जिला अस्पताल के आसपास संचालित सभी निजी जांच केंद्रों और क्लीनिकों का निरीक्षण कराया जाए।

इसके साथ ही सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने के आरोपों की भी जांच की जाए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन, अवैध संचालन या मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी संस्थानों में भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी भी निजी संस्थान, डॉक्टर या कर्मचारी पर लगाए गए आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित संस्थानों और आरोपित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना भी जरूरी है।

अब सवाल यह है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को जिला अस्पताल की सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह कब मिलेंगी? और जिला अस्पताल के आसपास संचालित निजी पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों की वैधानिकता तथा मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने के आरोपों पर प्रशासन कब ठोस जांच और कार्रवाई करेगा?

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