डोंगरगढ़ में जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल, तहसीलदार कार्यालय से जारी और एसडीएम कार्यालय में निरस्त होने के आरोप

डोंगरगढ़ में जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल, तहसीलदार कार्यालय से जारी और एसडीएम कार्यालय में निरस्त होने के आरोप

एक ही प्रशासनिक व्यवस्था में अलग-अलग निर्णय क्यों? रीडर के अधिकार और निरस्तीकरण के आधार पर उठे सवाल

डोंगरगढ़, राजनांदगांव।
डोंगरगढ़ अनुविभागीय क्षेत्र में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि तहसीलदार कार्यालय से आवेदकों को अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, लेकिन वही प्रमाण पत्र अथवा संबंधित आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय पहुंचने के बाद निरस्त किए जा रहे हैं।

इस कथित प्रक्रिया को लेकर आवेदकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और पात्रता के आधार पर तहसीलदार कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है, तो एसडीएम कार्यालय में उसे निरस्त करने का आधार क्या है?

एक ही प्रशासनिक व्यवस्था में दो अलग-अलग निर्णय क्यों?

मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक प्रक्रिया की एकरूपता को लेकर है। यदि दस्तावेजों में कोई कमी है या आवेदक जाति प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं है, तो संबंधित कमी या आपत्ति किस स्तर पर सामने आती है और उसे दूर करने का अवसर आवेदक को किस प्रकार दिया जाता है—इस पर स्पष्टता जरूरी है।

वहीं, यदि तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप नहीं है, तो प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई, यह भी जांच का विषय बन सकता है।

रीडर को निरस्तीकरण का अधिकार किस आधार पर?

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू एसडीएम कार्यालय के रीडर की भूमिका को लेकर भी सामने आ रहा है। आवेदकों का आरोप है कि उनके जाति प्रमाण पत्र अथवा आवेदनों को रीडर स्तर से निरस्त किया जा रहा है।

ऐसे में प्रशासन से यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि क्या रीडर को स्वतंत्र रूप से इस प्रकार के आवेदन या प्रमाण पत्र निरस्त करने का अधिकार है, अथवा वे सक्षम अधिकारी के आदेश के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं।

यदि निरस्तीकरण किसी सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के तहत किया जा रहा है, तो संबंधित आदेश, निरस्तीकरण का कारण और लागू नियम स्पष्ट किए जाने चाहिए। वहीं यदि आवेदन बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के निरस्त किए जा रहे हैं, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

आवेदकों के सामने बढ़ी परेशानी

जाति प्रमाण पत्र विद्यार्थियों, नौकरी के अभ्यर्थियों, छात्रवृत्ति, आरक्षण और विभिन्न शासकीय योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में एक कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी होने और दूसरे स्तर पर उसी प्रक्रिया के निरस्त होने से आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

आवेदकों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में कोई कमी है तो उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, ताकि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकें। साथ ही, आवेदन निरस्त किए जाने की स्थिति में उसका स्पष्ट कारण भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

प्रशासन से इन सवालों के जवाब की मांग

इस पूरे मामले को लेकर डोंगरगढ़ प्रशासन से प्रमुख रूप से इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है—

  • अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की निर्धारित प्रक्रिया क्या है?
  • तहसीलदार कार्यालय से जारी प्रमाण पत्र या आवेदन एसडीएम कार्यालय में किस आधार पर निरस्त किए जा रहे हैं?
  • जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने का सक्षम अधिकारी कौन है?
  • क्या रीडर को स्वयं आवेदन या प्रमाण पत्र निरस्त करने का अधिकार है?
  • निरस्तीकरण की स्थिति में आवेदक को लिखित कारण दिया जाता है या नहीं?
  • तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय की प्रक्रिया में एकरूपता क्यों नहीं दिखाई दे रही है?
  • ऐसे मामलों में आवेदकों को अपनी आपत्ति या दस्तावेजों की कमी दूर करने का अवसर किस प्रक्रिया के तहत दिया जाता है?

नियम स्पष्ट हों, जिम्मेदारी भी तय हो

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है तो संबंधित नियम, आदेश और अधिकार क्षेत्र को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

वहीं, यदि किसी स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है।

अब देखना होगा कि डोंगरगढ़ प्रशासन जाति प्रमाण पत्रों से जुड़े इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और आवेदकों की शिकायतों के निराकरण के लिए क्या कदम उठाता है।

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