पाराघाट में राशि स्टील के खिलाफ शिकायतों का अंबार, 117 एकड़ जमीन से लेकर खसरा नंबर 170 तक उठे गंभीर सवाल

पाराघाट में राशि स्टील के खिलाफ शिकायतों का अंबार, 117 एकड़ जमीन से लेकर खसरा नंबर 170 तक उठे गंभीर सवाल

करीब 40 किसान परिवारों ने नौकरी और पुनर्वास लाभ से वंचित किए जाने का लगाया आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

बिलासपुर/मस्तूरी, 31 अगस्त 2026।
बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाराघाट, बेलटुकरी एवं मनोहर क्षेत्र में राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड की भूमि एवं गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों और किसानों की ओर से जिला प्रशासन के समक्ष कई गंभीर शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं। सोमवार को कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष दिए गए अलग-अलग शिकायत आवेदनों में भूमि खरीदी, भू-अभिलेखों में कथित बदलाव, शासकीय रास्ते की स्थिति, भूमि हस्तांतरण तथा प्रभावित किसानों को रोजगार एवं पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। शिकायत के दौरान जिला ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, किसान नेता देव चंद्राकर, जनपद सदस्य राजू पंडित, पूर्व सरपंच पाराघाट प्रदीप सोनी, कांग्रेस नेता अमितेश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

117 एकड़ कृषि भूमि की खरीदी और वर्ष 2022 में बिक्री पर सवाल

कलेक्टर को सौंपे गए एक शिकायत आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पाराघाट, बेलटुकरी एवं भनौरा क्षेत्र के किसानों की करीब 117 एकड़ कृषि भूमि वर्ष 2003 से 2009 के बीच खरीदी गई थी।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जमीन खरीदे जाने के बाद लंबे समय तक संबंधित क्षेत्र में प्लांट स्थापित नहीं किया गया। इसके बाद करीब 12 से 13 वर्ष बाद वर्ष 2022 में उक्त भूमि को राशि पावर प्लांट पाराघाट को बेच दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यह जांच की जाए कि किसानों से जमीन किस उद्देश्य और किन शर्तों पर खरीदी गई थी। साथ ही यह भी जांच हो कि निर्धारित समयावधि में भूमि का उपयोग हुआ या नहीं, वर्तमान में भूमि किसके नाम दर्ज है तथा भूमि को दूसरे प्लांट अथवा कंपनी के नाम हस्तांतरित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

खसरा नंबर 170 को लेकर भी उठे सवाल

एक अन्य शिकायत में ग्राम पंचायत मनसेर से पाराघाट नीलागर नदी तक स्थित खसरा नंबर 170 की भूमि को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार इस भूमि का कुल रकबा करीब 10.21 एकड़ है और पूर्व में इसे शासकीय रास्ते के रूप में दर्ज बताया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर मनरेगा के तहत मिट्टी एवं मुरुम सड़क निर्माण का कार्य भी कराया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2022 में कथित बंटांकन की प्रक्रिया के बाद करीब 2.94 एकड़ भूमि प्लांट के नाम पर दर्ज किए जाने की बात सामने आई।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया की जानकारी ग्रामवासियों को नहीं दी गई तथा आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर भी सवाल हैं।

मामले में शिकायतकर्ताओं ने राजस्व अभिलेखों, बंटांकन, नामांतरण एवं भूमि हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

करीब 40 किसान परिवारों ने नौकरी और पुनर्वास लाभ नहीं मिलने का लगाया आरोप

तीसरे शिकायत आवेदन में ग्राम पाराघाट के करीब 40 किसान परिवारों का मुद्दा उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इन परिवारों की भूमि कंपनी की परियोजना से प्रभावित हुई है और प्रभावित परिवारों को रोजगार एवं पुनर्वास का लाभ दिए जाने की बात कही गई थी।

हालांकि, किसानों का आरोप है कि उन्हें अब तक अपेक्षित नौकरी और पुनर्वास संबंधी लाभ नहीं मिल पाया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अपने अधिकारों और लाभ की मांग करने वाले कुछ किसान परिवारों पर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है तथा पुलिस कार्रवाई का भय दिखाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर पात्र किसान परिवारों को नियमानुसार उनके अधिकारों का लाभ दिलाने की मांग की है।

भूमि, राजस्व रिकॉर्ड और पुनर्वास को लेकर जांच की मांग

एक साथ सामने आई इन शिकायतों के बाद पाराघाट क्षेत्र में भूमि खरीदी एवं उपयोग, राजस्व अभिलेखों में कथित परिवर्तन, शासकीय रास्ते की स्थिति, भूमि हस्तांतरण तथा प्रभावित किसानों के रोजगार और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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