SECL दीपका-गेवरा के भू-विस्थापितों के मुद्दे पर भारतीय जनता मजदूर संघ का आंदोलन का ऐलान, 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा

SECL दीपका-गेवरा के भू-विस्थापितों के मुद्दे पर भारतीय जनता मजदूर संघ का आंदोलन का ऐलान, 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा

दीपका-गेवरा/कोरबा। SECL के दीपका एवं गेवरा कोयला उत्खनन क्षेत्रों से प्रभावित भू-विस्थापितों के अधिकार, मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता मजदूर संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रदेश संयुक्त महामंत्री एवं समाजसेवी मनीराम भारती ने SECL प्रबंधन के समक्ष 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

संगठन का आरोप है कि ग्राम हरदीबाजार सहित प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। संघ का दावा है कि ड्रोन कैमरा, जीपीएस सर्वे और कथित तौर पर नियम विरुद्ध कट-ऑफ डेट के आधार पर कई भू-विस्थापित परिवारों के मुआवजे में 40 से 100 प्रतिशत तक कटौती की जा रही है।

मुआवजे में कटौती बंद करने की मांग

भारतीय जनता मजदूर संघ ने मांग की है कि मकानों और अन्य संरचनाओं के सर्वे में नया-पुराना का अंतर समाप्त कर सर्वे के समय मौजूद सभी संरचनाओं को मान्यता दी जाए। संगठन ने 100 प्रतिशत सोलेशियम क्षतिपूर्ति के साथ मुआवजा देने की मांग की है।

संघ ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वर्तमान बाजार दर के चार गुना मुआवजे की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही वर्ष 2004, 2010 और 2025 में अधिग्रहित भूमि के मामलों में लंबित ब्याज का भुगतान किए जाने की मांग की गई है।

रायपुर मार्गदर्शिका 2025 के अनुसार मुआवजा दर लागू करने की मांग

ज्ञापन में निर्माण एवं अन्य संपत्तियों के लिए संशोधित दरों के आधार पर मुआवजा देने की मांग की गई है। संगठन के अनुसार टीन शेड के लिए ₹2,800 प्रति वर्गफीट, बिल्डिंग के लिए ₹4,600 प्रति वर्गफीट, गोदाम के लिए ₹6,200 प्रति वर्गफीट तथा दुकान और स्कूल भवन के लिए ₹7,200 प्रति वर्गफीट की दर लागू की जानी चाहिए।

वहीं भूमि के लिए ₹32 लाख प्रति एकड़ की दर से चार गुना मुआवजा देने की मांग रखी गई है।

कोयला उत्पादन में 5 प्रतिशत लाभांश की मांग

संघ ने SECL की खदानों से होने वाले कोयला उत्पादन का 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष प्रभावित विस्थापित परिवारों को रॉयल्टी अथवा लाभांश के रूप में दिए जाने की मांग की है।

इसके अलावा संगठन ने पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी मांगें भी उठाई हैं। मांगों में 0.01 डिसमिल भूमि पर मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति 1991 के तहत स्थायी रोजगार देने, बसाहट में नहीं जाने वाले परिवारों को ₹15 लाख एकमुश्त राशि और ₹3 लाख मलबा धुलाई भत्ता देने तथा भूमिहीन विस्थापित परिवारों को ठेका कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

पुलिस और सुरक्षा बलों पर भी लगाए आरोप

भारतीय जनता मजदूर संघ ने ग्रामीणों के साथ कथित डराने-धमकाने और दबाव बनाने की शिकायत भी उठाई है। संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस बल, CRPF तथा निजी कंपनी के बाउंसरों के माध्यम से ग्रामीणों में भय का माहौल बनाया जा रहा है। संघ ने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

ज्ञापन में राष्ट्रपति सचिवालय, राज्यपाल और बिलासपुर संभागायुक्त कार्यालय से संबंधित पत्रों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का दावा है कि इन पत्रों के माध्यम से कोरबा कलेक्टर और SECL प्रबंधन से जवाब मांगा गया था, लेकिन मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो खदान बंदी की चेतावनी

भारतीय जनता मजदूर संघ ने SECL प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भू-विस्थापितों की समस्याओं का सम्मानजनक समाधान नहीं किया गया, तो प्रभावित ग्रामीणों के साथ मिलकर दीपका और गेवरा खदानों के सामने चक्काजाम किया जाएगा।

संगठन ने इसके बाद अनिश्चितकालीन खदान बंदी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। संघ ने आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या आर्थिक नुकसान के लिए SECL दीपका एवं गेवरा क्षेत्र के प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोप संगठन के पक्ष को दर्शाते हैं। इन आरोपों पर SECL प्रबंधन या जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर समाचार में उनका पक्ष भी शामिल किया जाना उचित होगा।

Advertisement 1
Advertisement 2
Advertisement 3

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *