ओखर गौशाला में 23 गौवंश की मौत, चारा-पानी के अभाव का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

ओखर गौशाला में 23 गौवंश की मौत, चारा-पानी के अभाव का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

गौ धाम वासुदेव सेवा समिति पर गंभीर लापरवाही के आरोप, कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग

पचपेड़ी/बिलासपुर, 28अगस्त 2026।
छत्तीसगढ़ में गौ-संरक्षण को लेकर संचालित योजनाओं के बीच बिलासपुर जिले के पचपेड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत ओखर से गौवंश की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में संचालित गौ धाम वासुदेव सेवा समिति गौशाला में 23 गौवंश की मौत हो गई। ग्रामीणों ने गौशाला में चारा-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने को मौतों का कारण बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

चारा-पानी की व्यवस्था नहीं होने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन की योजना के तहत उक्त गौशाला के संचालन एवं देखरेख की जिम्मेदारी गौ धाम वासुदेव सेवा समिति को दी गई थी, जबकि गौशाला की निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की बताई जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में रखे गए गौवंश को लंबे समय से पर्याप्त मात्रा में हरा चारा और पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक चारा-पानी की कमी के कारण कई गौवंश कमजोर होते गए और आखिरकार 23 गौवंश की मौत हो गई।

मौके पर पहुंचे ग्रामीण, वीडियो बनाया

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीण गौशाला पहुंचे। ग्रामीणों ने वहां मृत गौवंश की स्थिति का वीडियो बनाकर उसे साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखने की बात कही है। घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और ग्रामीण पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि गौशाला में गौवंश के लिए चारा, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की क्या व्यवस्था थी और उनकी देखरेख में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष प्रमुख रूप से ये मांगें रखी हैं—

  • पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार समिति पदाधिकारियों एवं संबंधित पंचायत जिम्मेदारों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
  • गौशाला की व्यवस्थाओं का तत्काल निरीक्षण कर वहां मौजूद शेष गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, पानी और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • मृत गौवंश की मौत के वास्तविक कारणों का भी प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण कराया जाए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगा मौत का वास्तविक कारण

गौवंश की मौत को लेकर ग्रामीणों की ओर से चारा-पानी के अभाव और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों और किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण प्रशासनिक जांच एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और गौशाला में गौवंश की मौत को लेकर जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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