
PCI के जवाब से असंतुष्ट संगठन ने अपील के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में दोबारा उठाया राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून का मुद्दा
नई दिल्ली/मुंबई। देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी पहल को और तेज कर दिया है। भारतीय प्रेस परिषद (PCI) से मिले जवाब से असंतुष्ट संगठन ने अपील दायर करने के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर नया आवेदन प्रस्तुत किया है।
ABPSS के राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज़ खान ने बताया कि संगठन की मूल मांग केवल पत्रकार सुरक्षा से संबंधित पूर्व रिपोर्टों और सिफारिशों की जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उन सिफारिशों के आधार पर वर्तमान समय में ठोस और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
PCI के जवाब से असंतुष्ट ABPSS ने दायर की अपील
संगठन द्वारा पूर्व में प्रस्तुत आवेदन संख्या PMOPG/E/2026/0143964, दिनांक 3 अगस्त 2026, प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज हुआ था। इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद की ओर से 17 अगस्त 2026 को जवाब दिया गया।
PCI के जवाब में बताया गया कि पत्रकारों की सुरक्षा के संबंध में वर्ष 2015 में रिपोर्ट तैयार की गई थी तथा पत्रकार सुरक्षा से संबंधित विधेयकों पर विचार करते हुए केंद्र सरकार से केंद्रीय कानून बनाने की सिफारिश भी की गई थी।
ABPSS का कहना है कि PCI के जवाब से यह स्पष्ट है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता का मुद्दा नया नहीं है। इस संबंध में पहले भी रिपोर्ट और सिफारिशें की जा चुकी हैं।
इसी जवाब से असंतुष्ट ABPSS ने अपील संख्या MOIAB/E/A/26/0000386, दिनांक 18 अगस्त 2026, प्रस्तुत की। संगठन ने अपील में स्पष्ट किया कि उसकी मांग केवल पूर्व रिपोर्ट अथवा सिफारिशों की जानकारी तक सीमित नहीं है। मुख्य सवाल यह है कि देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में केंद्र सरकार वर्तमान में क्या ठोस कार्रवाई कर रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में फिर प्रस्तुत किया आवेदन
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर ABPSS ने प्रधानमंत्री कार्यालय में नया आवेदन भी प्रस्तुत किया है। नए आवेदन का Registration No. PMOPG/E/2026/0156778 है, जिसे 18 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्राप्त किया गया।
नए आवेदन के माध्यम से केंद्र सरकार से वर्ष 2015 की पत्रकार सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट और केंद्रीय कानून बनाने को लेकर की गई पूर्व सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
संगठन ने यह भी जानना चाहा है कि वर्तमान में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून से संबंधित कोई प्रस्ताव, नीति, विधायी प्रक्रिया अथवा अन्य कार्रवाई विचाराधीन है या नहीं।
पत्रकार संगठनों से परामर्श की भी मांग
ABPSS ने राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून के संभावित प्रारूप और विधायी व्यवस्था को लेकर पत्रकार संगठनों, पत्रकार प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के साथ आवश्यक परामर्श प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार करने का अनुरोध किया है।
पत्रकार सुरक्षा लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मुद्दा: महफूज़ खान
ABPSS के राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज़ खान ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। जनहित, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं, सामाजिक समस्याओं और आम जनता की आवाज को सामने लाने के दौरान पत्रकारों को कई बार धमकी, हिंसा, हमले और विभिन्न प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार संगठनों का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता, लोकतंत्र और जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
महफूज़ खान ने स्पष्ट किया कि ABPSS की मांग किसी सरकार, मंत्रालय या संस्था के विरोध में नहीं है। संगठन का उद्देश्य देशभर के पत्रकारों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के लिए प्रभावी तथा स्थायी कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
ठोस कार्रवाई और स्पष्ट जवाब की मांग
ABPSS ने केंद्र सरकार से पूर्व में की गई सिफारिशों पर हुई कार्रवाई, वर्तमान स्थिति और आगे की प्रस्तावित कार्यवाही की स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
संगठन ने कहा है कि यदि इस विषय पर अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो ABPSS संविधान और कानून के दायरे में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक जनजागरूकता अभियान, प्रतिनिधिमंडल, धरना तथा अन्य वैधानिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को आगे बढ़ाएगी।
ABPSS का कहना है कि अब आवश्यकता केवल पूर्व में किए गए प्रयासों और सिफारिशों का उल्लेख करने की नहीं, बल्कि उनके परिणाम, वर्तमान स्थिति और आगे की ठोस कार्ययोजना को स्पष्ट करने की है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस गंभीर जनहित के विषय पर सकारात्मक और परिणामकारी कार्रवाई करेगी।
जारीकर्ता:
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS)
महफूज़ खान
राष्ट्रीय संगठन महासचिव

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