हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप: नर्सिंग भर्ती को लेकर जेएनएम मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन, सचिव को अवमानना नोटिस

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप: नर्सिंग भर्ती को लेकर जेएनएम मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन, सचिव को अवमानना नोटिस

नियमित भर्ती में देरी और संविदा भर्ती के विरोध में यूनियन का हल्लाबोल, मेरिट सूची सार्वजनिक नहीं करने पर भी उठे सवाल

रायपुर | छत्तीसगढ़ में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। जेएनएम मेडिकल कॉलेज परिसर में यूनियन ने प्रदर्शन और घेराव कर चिकित्सा शिक्षा विभाग पर हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए मेरिट सूची सार्वजनिक करने और नियमित भर्ती तत्काल शुरू करने की मांग की।

यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि करीब 2000 आवेदनों के आधार पर प्रारंभिक प्रवीण सूची जारी की गई थी। इसके बाद पात्र-अपात्र सूची, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया और अंतिम मेरिट सूची तैयार की गई, लेकिन मेरिट सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे अभ्यर्थियों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हुआ और भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे।

इधर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती से जुड़े मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए फैसले का तीन वर्ष बाद भी पालन नहीं किया गया।

क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम, 2013 की अनुसूची-3 के नोट-2 तथा 8 दिसंबर 2021 की भर्ती विज्ञप्ति के क्लॉज-5 को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 9 मार्च 2023 को इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करते हुए शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक की सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 16 के विपरीत माना था।

सीजीपीएससी ने मांगा था संशोधित अधियाचन

याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट के फैसले के बाद 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर न्यायालय के आदेश के अनुरूप संशोधित अधियाचन भेजने का अनुरोध किया था, ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा।

संविदा भर्ती पर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस विज्ञापन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सीजीपीएससी के 15 मार्च 2023 के पत्र का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी थी। अब हाईकोर्ट ने सचिव अमित कटारिया से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

नोट: भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, आदेश की अवहेलना और अन्य आरोप याचिकाकर्ताओं एवं प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही होगा।

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