NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के नाम लिखा खुला पत्र

NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के नाम लिखा खुला पत्र

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए देश के युवाओं के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। पत्र में उन्होंने अपने कार्यकाल, शिक्षा सुधारों, NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद, छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी है।

धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनका मानना है कि विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

NEET-UG 2026 विवाद पर दी सफाई

पत्र में उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया तथा भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का फैसला किया गया।

उन्होंने दावा किया कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा उपलब्ध कराना थी, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा अभिभावकों के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

“मेधावी छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने दिया”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की और परीक्षा माफिया के कारण किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होने देने का संकल्प लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम परिणामों में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई विद्यार्थियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्था पर विश्वास कायम है।

छात्रों को गुमराह करने का लगाया आरोप

पूर्व शिक्षा मंत्री ने बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और आंदोलन की दिशा प्रभावित करने का प्रयास किया। उन्होंने युवाओं से राजनीतिक स्वार्थों से दूर रहकर अपने भविष्य और शिक्षा पर ध्यान देने की अपील की।

जंतर-मंतर आंदोलन का भी किया उल्लेख

धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों का लाभ राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं मिलने देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और कानूनी विवादों में भविष्य न उलझाने की अपील की।

प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार

अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का धन्यवाद देते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वे आगे भी देश एवं युवाओं के हित में कार्य करते रहेंगे।

CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का बड़ा बयान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”

उन्होंने इसे संगठित संघर्ष और लोकतांत्रिक दबाव की जीत बताते हुए कहा कि जब सत्ता जवाबदेही से बचने की कोशिश करती है, तब जनआंदोलन बदलाव का माध्यम बनते हैं। उनके इस बयान के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि छात्रों के साथ न्याय और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना था।

उन्होंने बताया कि सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया। इस आश्वासन में परीक्षा प्रणाली पर संसद में चर्चा, छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने और अन्य मांगों पर विचार करने की बात शामिल थी।

वांगचुक ने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा छात्रों के हित में नहीं है।

राजनीतिक महत्व

यदि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और खुला पत्र आधिकारिक रूप से जारी किया गया है, तो इसे केंद्र सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, छात्र आंदोलनों और सरकार की जवाबदेही को लेकर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिल सकती है।

नोट: इस खबर में शामिल इस्तीफे, खुले पत्र और संबंधित दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। आधिकारिक अधिसूचना या सरकार की पुष्टि उपलब्ध होने पर ही इन्हें अंतिम रूप से पुष्ट माना जाना चाहिए।

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