बिल्हा के पिरैया में वीरांगना महारानी दुर्गावती का 462वां शहादत दिवस मनाया गया, मेधावी छात्र एवं कर्मचारियों का हुआ सम्मान

बिल्हा के पिरैया में वीरांगना महारानी दुर्गावती का 462वां शहादत दिवस मनाया गया, मेधावी छात्र एवं कर्मचारियों का हुआ सम्मान

बिलासपुर | खबर36गढ़ डेस्क

विकासखंड बिल्हा अंतर्गत ग्राम पंचायत प्रमंडल पिरैया में शनिवार, 28 जून 2026 को वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का 462वां शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मेधावी छात्र एवं कर्मचारी सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करना तथा समाज में शिक्षा, एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष श्री लव सिदार उपस्थित रहे। उनके साथ बब्लू मरकाम, राजाराम, गिरधारी नेटी, हेमराज, अशोक मरकाम, प्रहलाद, मन्नू आयम, दिलीप ध्रुव, दिलहरण ध्रुव, शुभम मरावी, बंटी ध्रुव, विजय ध्रुव सहित सर्व आदिवासी समाज बिलासपुर के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

समारोह के दौरान मेधावी विद्यार्थियों एवं विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने और समाज का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में लव सिदार ने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों से उच्च शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर प्रशासनिक एवं अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने समाज के कर्मचारियों से भी अपील की कि वे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों की शिक्षा में हरसंभव सहयोग करें, ताकि संसाधनों के अभाव में किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम वर्ग को आगे आकर जरूरतमंद विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और सहयोग करना चाहिए।

अपने उद्बोधन में उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है, इसलिए आने वाली पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान समाज की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने समाजजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाज और सामाजिक एकता को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।

समारोह के अंत में सभी अतिथियों, सम्मानित विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं समाजजनों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ और समाज के विकास, शिक्षा तथा सामाजिक एकजुटता के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया।

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