बिना जांच पत्रकारों पर FIR का विरोध, बिलासपुर के पत्रकारों ने आईजी और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बिना जांच पत्रकारों पर FIR का विरोध, बिलासपुर के पत्रकारों ने आईजी और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

पत्रकार सुरक्षा कानून के पालन और गिरफ्तारी पर रोक की मांग, अधिकारियों ने निष्पक्ष कार्रवाई का दिया आश्वासन
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बिलासपुर। बिलासपुर जिले के पत्रकारों ने हाल ही में पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर के विरोध में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि बिना निष्पक्ष जांच के पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जो पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों और स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना के विपरीत है।
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि छत्तीसगढ़ में लागू पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक-2023 तथा पत्रकारों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिन पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनकी गिरफ्तारी पर जांच पूरी होने तक रोक लगाने की मांग भी की गई।
क्या है मामला
ज्ञापन में बताया गया कि कुछ समय पहले सिविल लाइन थाना, बिलासपुर के पुराने भवन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक पुलिस आरक्षक वर्दी पहने जमीन पर सोता दिखाई दे रहा था, जबकि दूसरे कमरे में शराब और बीयर की बोतलें रखी नजर आ रही थीं। यह वीडियो विभिन्न समाचार पोर्टलों और मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुआ था।
पत्रकारों का कहना है कि समाचार प्रकाशित करते समय पुलिस प्रशासन का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच और कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी समाचारों में शामिल की गई थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वीडियो सार्वजनिक नहीं करने के बदले धनराशि मांगने का दावा किया गया। इसी ऑडियो के आधार पर पुलिस ने पत्रकार जिया खान, अनुज श्रीवास्तव सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
बिना जांच एफआईआर दर्ज करने का आरोप
पत्रकार समुदाय का आरोप है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले संबंधित पत्रकारों का बयान नहीं लिया गया और न ही उनका पक्ष जाना गया। ज्ञापन में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच किए बिना सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिया गया, जिससे पत्रकार समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है।
पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी पत्रकार पर गंभीर आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले एफआईआर दर्ज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
पत्रकार सुरक्षा कानून के पालन की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर दिशा-निर्देश और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। पत्रकारों का दावा है कि पत्रकारों के विरुद्ध शिकायतों की जांच के लिए गठित समिति से जांच कराए बिना कार्रवाई की गई है।
पत्रकारों ने मांग की कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में निर्धारित समिति द्वारा जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
प्रमुख मांगें
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष निम्न मांगें रखीं—
पत्रकार जिया खान एवं अनुज श्रीवास्तव के विरुद्ध दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच पूरी होने तक कठोर कार्रवाई एवं गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
भविष्य में पत्रकारों के विरुद्ध किसी भी शिकायत पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाए।
पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि निर्धारित समयावधि में निष्पक्ष जांच प्रारंभ नहीं की जाती और पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो पत्रकार समुदाय चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा। इसमें धरना, प्रदर्शन, जनजागरण अभियान और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
मुलाकात के दौरान आईजी रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पत्रकार प्रतिनिधियों की बात गंभीरता से सुनी। पत्रकारों के अनुसार दोनों अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा तथा मामले में कानून और प्रक्रिया के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले में अंतिम निर्णय और जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस घटनाक्रम ने पत्रकार सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी

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