
बिलासपुर/बलरामपुर | विशेष रिपोर्ट
अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विधानसभा चुनाव लड़ने और विधायक बनने के मामले में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठी है। शिकायतकर्ता ने जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति तथा राज्य स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति को आवेदन सौंपकर कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उसकी शिकायत का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण नहीं किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने 8 अप्रैल 2025 को एक शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने स्वयं को गोंड अनुसूचित जनजाति का सदस्य बताते हुए वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन दाखिल किया और चुनाव जीतकर विधायक बनीं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विधायक द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र फर्जी एवं कूटरचित है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित जाति प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप जारी नहीं किया गया तथा इस संबंध में विस्तृत दस्तावेज और साक्ष्य पूर्व में भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। याचिका क्रमांक WPC 2966/2025 में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 17 जून 2025 को आदेश पारित किया था। इसके बाद 4 जून 2026 को पारित आदेश में न्यायालय ने संबंधित शिकायत का निराकरण चार माह के भीतर करने का निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि न्यायालय के आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है, लेकिन अब तक शिकायत की जांच पूरी कर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
अवमानना याचिका भी दायर
आवेदन के अनुसार न्यायालय के निर्देशों के पालन में विलंब होने के कारण शिकायतकर्ता ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका भी दायर की है। आवेदन में कहा गया है कि यदि समयबद्ध जांच और निर्णय नहीं किया गया तो यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जा सकता है।
जांच पूरी कर निर्णय की मांग
शिकायतकर्ता ने राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समितियों से मांग की है कि मामले की शीघ्र जांच कर अंतिम निर्णय पारित किया जाए तथा यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं शिकायतकर्ता ने उम्मीद जताई है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप मामले का जल्द और निष्पक्ष निराकरण किया जाएगा।

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