भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पूर्व कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा के खिलाफ शिकायत सीवीसी तक पहुंची, मुख्य सचिव को भेजा गया मामला

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पूर्व कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा के खिलाफ शिकायत सीवीसी तक पहुंची, मुख्य सचिव को भेजा गया मामला

विकास कार्यों, राजस्व मामलों, अवैध खनन और आदिवासी क्षेत्रों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, सीवीसी ने शिकायत राज्य शासन को भेजी


बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पदस्थ रहे पूर्व कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा के कार्यकाल को लेकर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, राजस्व हानि और आदिवासी क्षेत्रों में कथित शोषण के गंभीर आरोपों का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। जिले के निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ भगत द्वारा की गई शिकायत पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने संज्ञान लेते हुए मामले को आगे की कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को प्रेषित कर दिया है।
शिकायतकर्ता को प्राप्त सीवीसी के पत्र क्रमांक 149749/2026 दिनांक 22 मई 2026 के अनुसार, ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त शिकायत का प्रारंभिक परीक्षण किया गया। आयोग ने पाया कि मामला राज्य शासन के अधिकारी से संबंधित है, जो उसके प्रत्यक्ष अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके बाद शिकायत को आवश्यक कार्रवाई हेतु मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भेज दिया गया।
विकास कार्यों में अनियमितताओं का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में जिले में संचालित विभिन्न विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि कई परियोजनाओं में कार्यों के क्रियान्वयन और व्यय के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
राजस्व और भूमि प्रकरणों पर सवाल
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों को संरक्षण देकर शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में अनियमितताओं को बढ़ावा दिया गया। सीमावर्ती क्षेत्रों में नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण शासन को नुकसान और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अवैध खनन और राजस्व हानि का मुद्दा
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जिले के कुछ क्षेत्रों में अवैध खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ। शिकायतकर्ता ने संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है।
आदिवासी क्षेत्रों में कथित शोषण के आरोप
आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले को लेकर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव का लाभ उठाकर कुछ मामलों में आदिवासी परिवारों पर दबाव बनाया गया और भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों में गड़बड़ियां हुईं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई शिकायत
शिकायतकर्ता सोमनाथ भगत ने अपनी शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तथा सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को भी भेजी हैं। उनका कहना है कि मामला एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण निष्पक्ष और प्रभावमुक्त जांच जरूरी है।
दस्तावेज और समाचार कटिंग किए गए संलग्न
शिकायत के साथ विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों की प्रतियां और अन्य दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि ये दस्तावेज आरोपों की गंभीरता को दर्शाते हैं और जांच की आवश्यकता को मजबूत करते हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पूर्व कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा के पूरे कार्यकाल की किसी स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है।
संबंधित पक्ष का पक्ष आना बाकी
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। न तो किसी जांच एजेंसी ने आरोपों को सत्यापित किया है और न ही इस संबंध में संबंधित अधिकारी या उनके प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया सामने आई है।
पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के अनुसार यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शिकायत में लगाए गए आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं। उनकी सत्यता का निर्धारण सक्षम जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही संभव होगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छत्तीसगढ़ शासन, मुख्य सचिव कार्यालय और संबंधित जांच एजेंसियां इस शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई करती हैं। वहीं जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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