

पूरे महीने काम, भुगतान सिर्फ 10-12 दिनों का; ठेका कंपनी पर गंभीर आरोप
South Eastern Coalfields Limited के दीपका क्षेत्र स्थित कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी Hems Corporation पर लगभग 400 ठेका मजदूरों के आर्थिक और मानसिक शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी “शॉर्ट अटेंडेंस” के नाम पर संगठित तरीके से वेतन में भारी कटौती कर रही है।
पीड़ित श्रमिकों ने मामले की लिखित शिकायत SECL के महाप्रबंधक (GM) सहित संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए न्याय की मांग की है। श्रमिकों का कहना है कि वे महीनेभर 26 से 30 दिन तक लगातार काम करते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में कम उपस्थिति दर्ज कर उन्हें केवल 10 से 12 दिनों का ही भुगतान किया जाता है।
वेतन पर्ची तक नहीं देने का आरोप
श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि कथित वित्तीय गड़बड़ी को छिपाने के लिए उन्हें वेतन पर्ची (Pay Slip) भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। मजदूरों का कहना है कि कई बार मांग करने के बावजूद कंपनी की ओर से भुगतान का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया।
मजदूरों के अनुसार, यदि उपस्थिति और भुगतान का वास्तविक रिकॉर्ड सार्वजनिक हो जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
मामले में SECL के कार्मिक (Personnel) और E&M विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से विभाग यह मानता रहा कि मजदूर महीने में केवल 12 से 15 दिन ही कार्य करते हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “आधुनिक बंधुआ मजदूरी” का नया रूप बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
“मलगांव मुआवजा घोटाले से भी बड़ा मामला”
पर्यावरण एवं SECL मामलों के जानकार शेत मसीह ने दावा किया कि दीपका क्षेत्र में पहले से चर्चित मलगांव मुआवजा घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI द्वारा की जा रही है, लेकिन मजदूरों के वेतन में कथित हेराफेरी का यह मामला आर्थिक रूप से उससे भी बड़ा हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों, कुछ अधिकारियों और स्थानीय प्रभावशाली तत्वों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित हो रहा है।
कोयला संपदा की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
विज्ञप्ति में यह भी चिंता जताई गई है कि यदि मजदूरों की मजदूरी में कथित गड़बड़ी हो रही है, तो देश की महत्वपूर्ण कोयला संपदा और उसके परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कुछ सामाजिक संगठनों ने आशंका जताई है कि अधिकारियों की मिलीभगत से कोयले के अवैध खेल की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति, किसान सभा और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना सहित विभिन्न संगठनों ने जिला प्रशासन, श्रम विभाग और SECL प्रबंधन से तत्काल जांच एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब नजर कोरबा जिला प्रशासन और श्रम विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। मजदूरों का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों तक ले जाएंगे।

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