 ऐतिहासिक नगरी मल्हार में 2000 वर्ष पुराना ताम्रपत्र मिला, इतिहास की अनमोल धरोहर उजागर

 ऐतिहासिक नगरी मल्हार में 2000 वर्ष पुराना ताम्रपत्र मिला, इतिहास की अनमोल धरोहर उजागर

बिलासपुर, 26 अप्रैल 2026 | रेहाना
✍️मल्हार की ऐतिहासिक धरती से एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खोज सामने आई है। ज्ञान भारतम् अभियान के तहत यहां एक लगभग 2000 वर्ष पुराना ताम्रपत्र मिला है, जो इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह दुर्लभ ताम्रपत्र स्थानीय निवासी संजीव पाण्डेय के घर से प्राप्त हुआ है, जिसका वजन 3 किलोग्राम से अधिक बताया जा रहा है। इस ताम्रपत्र पर प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लेख उत्कीर्ण हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं।
♦️ क्या है इस खोज की खासियत?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मी लिपि भारत की सबसे प्राचीन लिपियों में से एक है, जिसका उपयोग मौर्य काल से शुरू होकर सदियों तक होता रहा। वहीं पाली भाषा का संबंध बौद्ध धर्म के ग्रंथों और शिक्षाओं से है, जिससे इस खोज का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।
ऐसे ताम्रपत्रों का उपयोग प्राचीन समय में:
भूमि दान के प्रमाण के रूप में
राजकीय आदेश जारी करने में
धार्मिक घोषणाओं के दस्तावेज के तौर पर
किया जाता था। इस ताम्रपत्र के विस्तृत अध्ययन से उस समय की सामाजिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
♦️ ज्ञान भारतम् अभियान की बड़ी सफलता
संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत देशभर में प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। यह अभियान गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को अपनी पुरानी धरोहरों को सुरक्षित रखने और सामने लाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
विशेषज्ञों द्वारा इन पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य विरासत को संरक्षित किया जा सके।
♦️ क्यों है यह खोज अहम?
मल्हार में मिला यह ताम्रपत्र:
क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को उजागर करता है
शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए नई संभावनाएं खोलता है
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने में मददगार साबित हो सकता है
👉कुल मिलाकर, यह खोज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और शोध का नया अध्याय बनकर सामने आई है।

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