थाने में चोर घुसा या थाने का चोर? बसंतपुर थाना कांड से पुलिस व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

थाने में चोर घुसा या थाने का चोर? बसंतपुर थाना कांड से पुलिस व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

भारत सम्मान | विशेष रिपोर्ट
✍️छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस व्यवस्था की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कस्टडी में रखे गए पिकअप वाहन से टायर बदलने और धान चोरी होने के आरोप ने पूरे जिले में चर्चा तेज कर दी है।
♦️क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी मटुकधारी (पिता धनुकधारी) 27 नवंबर 2025 को अपने पिकअप वाहन (UP 64 CT 4056) में 67 बोरी धान लोड कर छत्तीसगढ़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान बसंतपुर थाना पुलिस ने वाहन का पीछा किया।
बताया जा रहा है कि वाहन को बसंतपुर निवासी राजकुमार गुप्ता के घर के पास खड़ा कर दिया गया, जहां से ड्राइवर फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर थाने पहुंचा दिया।
♦️थाने तक कैसे पहुंची गाड़ी?
स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, पुलिस ने उन्हें वाहन थाने तक ले जाने के लिए कहा, जिसके बाद उन्होंने स्वयं पिकअप को चलाकर बसंतपुर थाना पहुंचाया। बाद में वाड्रफनगर तहसील के तहसीलदार द्वारा वाहन को जब्त कर थाना प्रभारी को सुपुर्द कर दिया गया।
♦️कोर्ट के आदेश के बाद खुला मामला
24 अप्रैल 2026 को बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय द्वारा वाहन रिलीज करने का आदेश जारी किया गया। जब वाहन मालिक मटुकधारी आदेश लेकर थाने पहुंचे और अपनी गाड़ी देखी, तो वे हैरान रह गए।
♦️उनके आरोप के अनुसार—
गाड़ी के दो नए टायर गायब थे
उनकी जगह पुराने और सड़े हुए टायर लगाए गए थे
67 बोरी धान में से 4 बोरी कम पाई गई
♦️मौके पर क्या मिला?
सूचना मिलने पर पत्रकार रामहरी गुप्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने पाया कि वाहन अपेक्षाकृत नया था और कुछ टायर कंपनी के ओरिजिनल थे, जबकि दो टायर बदले हुए नजर आए—जिससे टायर बदलने की आशंका मजबूत होती है।
♦️पीड़ित का आरोप और विरोध
वाहन मालिक मटुकधारी ने इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही या मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है—
“जब थाना ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी?”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनके दोनों टायर और चार बोरी धान वापस नहीं मिलते, वे वाहन नहीं ले जाएंगे।
♦️पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
मामले में पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद डीएसपी विश्व दीपक त्रिपाठी को जानकारी दी गई।
डीएसपी ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
♦️पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सरगुजा जिले के दरिमा थाना में भी पुलिस हिरासत में रखे गए ट्रैक्टर से टायर और पार्ट्स चोरी होने का मामला सामने आया था।
उस मामले में आरोप लगे थे कि—
जब्त ट्रैक्टर के नए टायर और पार्ट्स चोरी किए गए
पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाई गई
स्थानीय व्यापारी को सामान बेचने की कोशिश हुई
जांच में जिन पर आरोप लगे—
प्रधान आरक्षक संतोष कुमार गुप्ता
आरक्षक जगेश्वर बघेल
♦️क्या हुई थी कार्रवाई?
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई करते हुए—
संतोष कुमार गुप्ता को डिमोट कर आरक्षक बना दिया
जगेश्वर बघेल को न्यूनतम वेतनमान पर रखने का दंड दिया
♦️उठते बड़े सवाल
क्या थानों में जब्त वाहन और सामान भी सुरक्षित नहीं हैं?
क्या पुलिस कस्टडी में चोरी संभव है या अंदरूनी मिलीभगत है?
क्या ऐसे मामलों में जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी?
♦️निष्कर्ष
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से साफ संकेत मिलता है कि थानों में जब्त वाहनों की सुरक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निगरानी और जवाबदेही की कमी कहीं न कहीं पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बसंतपुर थाना मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोषियों पर ठोस कार्रवाई हो पाती है या नहीं।

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