बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार: 4 घंटे में समंदर तक सफर, इकोनॉमिक कॉरिडोर से विकास को नई रफ्तार

बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार: 4 घंटे में समंदर तक सफर, इकोनॉमिक कॉरिडोर से विकास को नई रफ्तार

बिलासपुर | 19 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) के निर्माण से बस्तर अब सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ने की ओर बढ़ रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं को तोड़ते हुए आर्थिक संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।
7-9 घंटे का सफर अब 4 घंटे में
वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक पहुंचने में ओडिशा के दुर्गम घाटों से गुजरना पड़ता है, जिससे 7 से 9 घंटे लगते हैं। नए कॉरिडोर के बनने के बाद यह दूरी घटकर महज 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी।
घाट-मुक्त और सीधा मार्ग होने से परिवहन लागत में भारी कमी आएगी, जिससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी।
नबरंगपुर इंटरचेंज बनेगा गेमचेंजर
कॉरिडोर रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव से होकर गुजरेगा।
नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज बस्तर के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभाएगा, जहां से जगदलपुर का ट्रैफिक सीधे कॉरिडोर में शामिल हो सकेगा।
बस्तरिया उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। बस्तर की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प अब आसानी से विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच सकेंगे।
कम लॉजिस्टिक लागत के चलते ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे और किसानों व शिल्पकारों को बेहतर मूल्य मिलेगा।
रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
यह कॉरिडोर बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे आकांक्षी जिलों में विकास की नई लहर लाएगा।
लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसर
औद्योगिक क्लस्टर के विकास की संभावना
खनिज संपदा, विशेषकर लौह अयस्क, के निर्यात में तेजी
पर्यटन को भी मिलेगी नई उड़ान
बेहतर कनेक्टिविटी से बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थल—
दंतेश्वरी मंदिर
चित्रकोट जलप्रपात
तीरथगढ़ जलप्रपात
कुटुमसर गुफा
तक देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन राजस्व में वृद्धि होगी।
पर्यावरण के साथ संतुलित विकास
कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है। यह टनल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरेगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एनिमल अंडरपास, ओवरपास और मंकी कैनोपी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं भी विकसित की जा रही हैं।
16,491 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना
करीब 464 किमी लंबा यह कॉरिडोर 16,491 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। यह न केवल दूरी घटाएगा, बल्कि बस्तर जैसे जनजातीय क्षेत्रों को देश और दुनिया की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना राज्य के समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।
वहीं अरुण साव ने इसे प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाला प्रोजेक्ट बताया।
निष्कर्ष
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर के लिए सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का माध्यम बनकर उभर रहा है। यह परियोजना बस्तर को “लैंड-लॉक्ड” क्षेत्र से निकालकर वैश्विक व्यापार के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

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