करंट के जाल में मौत: मैनेपाट जंगल में अवैध शिकार का खौफनाक खुलासा, 6 आरोपी गिरफ्तार

करंट के जाल में मौत: मैनेपाट जंगल में अवैध शिकार का खौफनाक खुलासा, 6 आरोपी गिरफ्तार

11 केवी लाइन से जोड़कर बिछाया गया था 1300 मीटर लंबा तार, युवक और सियार की गई जान


मैनेपाट/सरगुजा | विशेष रिपोर्ट
✍️सरगुजा जिले के मैनेपाट वन परिक्षेत्र से अवैध शिकार का एक बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शिकार के लिए बिछाए गए करंट के जाल में फंसकर एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक सियार भी करंट की चपेट में आकर मारा गया। यह घटना 25 मार्च 2026 की बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैनेपाट वन परिक्षेत्र के बंदना परिसर अंतर्गत कक्ष क्रमांक पी-2355, स्थानीय नाम बड़ेरा जंगल में एक युवक का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान मिसर यादव (पिता- कांशी यादव), निवासी ग्राम मुड़गिडीह के रूप में की गई है। घटनास्थल पर एक सियार का शव भी मिला, जिससे स्पष्ट हुआ कि करंट का जाल वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए बिछाया गया था।
✍️सुनियोजित तरीके से बिछाया गया मौत का जाल
वन विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि करीब 1300 मीटर लंबा जीआई तार 11 केवी बिजली लाइन से जोड़कर मड़ियाकोंना से घटना स्थल तक फैलाया गया था। यह पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी, जो इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हुई।
✍️वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
वनमंडलाधिकारी सरगुजा के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सीतापुर के मार्गदर्शन में मैनेपाट वन अमले ने तत्काल जांच शुरू की। जांच के दौरान 6 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
✍️गिरफ्तार आरोपी:
जहर (70 वर्ष)
जयपाल (45 वर्ष)
निर्मल कुजूर (65 वर्ष)
घुरसाय (38 वर्ष)
विश्वनाथ (46 वर्ष)
श्यामसुंदर (25 वर्ष)
सभी आरोपी अलग-अलग गांवों के निवासी हैं और मिलकर अवैध शिकार के इस खतरनाक नेटवर्क को अंजाम दे रहे थे।
✍️मौके से बरामद हुए साक्ष्य
वन विभाग ने घटनास्थल से करंट प्रवाहित तार, खूंटी और मृत सियार को जब्त किया। इसके बाद वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कमलेश्वरपुर थाना पहुंचाया।
✍️कानूनी शिकंजा कसा
आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2002) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
✍️बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अवैध शिकार के लिए करंट का इस्तेमाल न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि इंसानों के लिए भी बेहद खतरनाक और घातक है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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