मदकू द्वीप बना भ्रष्टाचार का अड्डा?

मदकू द्वीप बना भ्रष्टाचार का अड्डा?

70 लाख की बाउंड्रीवाल निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, स्थानीय मजदूरों की अनदेखी का आरोप


✍️मुंगेली 21/2/26 जिले का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल मदकू द्वीप इन दिनों विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। हरिहर क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध इस स्थल पर कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
💥शासन ने दी राशि, निर्माण पर विवाद
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मदकू द्वीप के विकास के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी क्रम में वन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा लगभग 70 लाख रुपये की लागत से मंदिर परिसर में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में संरचना की मजबूती पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
💥तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थल निरीक्षण के आधार पर निम्न गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई है—
कॉलम में 12 मिमी सरिया की जगह 8 मिमी सरिया का उपयोग।
रिंग के लिए 8 मिमी के स्थान पर 5 मिमी सरिया लगाए जाने का आरोप।
नियमानुसार 4×4 फीट गहरी खुदाई की बजाय केवल 1 से 1.5 फीट गहराई में ही कॉलम डाले जा रहे हैं।
तकनीकी जानकारों का कहना है कि इतनी कम गहराई पर तैयार नींव दीवार का भार सुरक्षित रूप से वहन नहीं कर पाएगी, जिससे भविष्य में दीवार झुकने या गिरने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।
💥अधिकारियों के विरोधाभासी बयान से बढ़ा संदेह
जनपद पंचायत पथरिया के सभापति मनीष साहू ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य को लेकर विभागीय अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे—
डीएफओ द्वारा कार्य विभागीय स्तर पर कराए जाने की बात कही गई।
संबंधित रेंजर ने इसे ठेके पर कराया जाना बताया।
मौके पर मौजूद कर्मियों ने किसी अन्य व्यक्ति द्वारा निर्माण कराए जाने की जानकारी दी।
इन विरोधाभासी दावों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
💥स्थानीय मजदूरों को काम नहीं, बाहरी श्रमिक लगाए जाने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य होने के बावजूद मदकू ग्राम पंचायत के मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा।
आरोप है कि मजदूरों को बलौदा बाजार जिले के परसवानी और अकोली क्षेत्रों से बुलाकर कार्य कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने इसे क्षेत्रीय लोगों के साथ अन्याय बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
💥उच्च स्तर पर की गई शिकायत
सभापति मनीष साहू ने कलेक्टर, उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री को व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत भेजकर मांग की है—
निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए।
स्वतंत्र एजेंसी से इंजीनियरिंग गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए।
दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो।
💥मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन
मदकू द्वीप के विकास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा मामला पहले से ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है। प्रशासन और वन विभाग द्वारा न्यायालय को विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
💥प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी जनता की निगाहें
मदकू द्वीप आस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जा रही है।
अब क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या स्वतंत्र जांच होगी? क्या गुणवत्ता परीक्षण कराया जाएगा? और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

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