पहले भी उठे थे सवाल, फिर भी खामोश रहा प्रशासन
मुंगेली।
तहसील अंतर्गत सेवा सहकारी समिति मर्या. कोदवा, पंजीयन क्रमांक 506 के अधीन संचालित उपार्जन केंद्र कोदवा में किसानों से खुलेआम अवैध वसूली और धान तौल में भारी अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि समिति में कार्यरत हमालों द्वारा प्रति बोरी 3 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है, जिससे सैकड़ों किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निर्धारित वजन की अनदेखी, किसानों से जबरन अधिक धान लिया जा रहा
किसानों के अनुसार शासन द्वारा तय 40 किलो 600 ग्राम के मानक के विरुद्ध समिति प्रबंधन द्वारा किसानों से 41 किलो 200 ग्राम से लेकर 41 किलो 70 ग्राम तक धान तौल कराया जा रहा है। इस अतिरिक्त वजन से किसानों की उपज का सीधा नुकसान हो रहा है, लेकिन विरोध करने पर उन्हें खरीदी रोकने या परेशान करने की धमकी दी जाती है।
औचक निरीक्षण में उजागर हुई गड़बड़ी, कार्रवाई फाइलों में कैद
सूत्रों के अनुसार औचक निरीक्षण में अनियमितताओं के संकेत भी मिले थे, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का आरोप है कि हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में दबाने की तैयारी की जा रही है, जिससे दोषियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
यह सिर्फ कोदवा नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का पैटर्न
धान खरीदी में गड़बड़ी अब किसी एक समिति या जिले तक सीमित नहीं रही। बीते वर्षों में लगभग हर खरीफ सीजन के बाद राज्य के अलग-अलग जिलों से—
बोरी कम मिलने
वजन में हेराफेरी
फर्जी परिवहन
और अवैध वसूली
जैसे मामले सामने आते रहे हैं।
अक्सर देखने में आता है कि—
जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है
निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित कर खानापूर्ति कर दी जाती है
जबकि प्रबंधक, समिति प्रभारी और बिचौलिया नेटवर्क जांच से बाहर रह जाते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल
इतने बड़े आर्थिक शोषण के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है—
क्या दोषियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
क्या यह मामला भी हर साल की तरह दबा दिया जाएगा?
और क्या सहकारी समितियों की धान खरीदी व्यवस्था में सुधार सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगी?
किसानों की मांग — वसूली की राशि लौटे, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
किसानों ने स्पष्ट मांग की है कि—
उनसे की गई अवैध वसूली की राशि वापस दिलाई जाए,
वजन में की जा रही हेराफेरी पर तत्काल रोक लगे,
और दोषी कर्मचारियों व समिति प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर मामले में वास्तविक दोषियों तक पहुंचती है, या फिर यह मामला भी छत्तीसगढ़ के धान घोटालों की लंबी सूची में एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।

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