मुंगेली जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारू, पारदर्शिता के साथ जारी

मुंगेली जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारू, पारदर्शिता के साथ जारी

अब तक 17.94 लाख क्विंटल धान की खरीदी, 426 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

मुंगेली, 17 दिसंबर 2025।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मुंगेली जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में पूरी पारदर्शिता और सुचारू व्यवस्था के साथ जारी है। जिले की 66 सहकारी समितियों के अंतर्गत संचालित 105 धान खरीदी केंद्रों में अब तक 1 लाख 10 हजार पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जा रही है।

जिले में अब तक कुल 17 लाख 94 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। इसमें मोटा धान 10 लाख 18 हजार 713 क्विंटल, पतला धान 135 क्विंटल तथा सरना धान 7 लाख 75 हजार 246 क्विंटल शामिल है। खरीदी केंद्रों से धान का उठाव कार्य भी निरंतर जारी है और अब तक 3 लाख 80 हजार क्विंटल से अधिक धान का उठाव किया जा चुका है।

प्रशासन द्वारा किसानों को त्वरित और आसान भुगतान सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। धान खरीदी के तीन दिन के भीतर ही किसानों के खातों में भुगतान किया जा रहा है। अब तक 39 हजार 985 किसानों को 426 करोड़ 61 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। जिले के 10 सहकारी बैंकों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2 हजार किसानों को 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा रहा है।

इसके साथ ही सभी 66 समितियों में माइक्रो एटीएम के माध्यम से प्रतिदिन 20 हजार रुपये तक नगद भुगतान की सुविधा दी जा रही है। आसान बैंकिंग व्यवस्था के तहत जिले के 27 हजार से अधिक किसानों को एटीएम कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं, वहीं चेक बुक का वितरण भी किया जा रहा है।

कलेक्टर के निर्देशानुसार अवैध धान भंडारण एवं परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए जिले की सीमाओं एवं चेक पोस्टों पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है। संदिग्ध वाहनों और परिवहन गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सभी आंतरिक चेक पोस्टों पर टीमों की तैनाती के साथ रात्रिकालीन गश्त एवं सघन जांच की जा रही है।

कोचियों एवं बिचौलियों के माध्यम से अवैध धान खपाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे खरीदी व्यवस्था पारदर्शी और किसान हितैषी बनी रहे।

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