♦️ छठ पूजा समिति सहित छठ माता के भक्तों ने एशिया के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट पर किया श्रमदान

रविवार को खरना पूजा के साथ शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत

बिलासपुर।
संस्कारधानी बिलासपुर में सूर्य उपासना का सबसे बड़ा महापर्व छठ पूजा प्रारंभ हो चुका है। शनिवार को अरपा मैया की महाआरती के साथ धार्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ, वहीं रविवार की सुबह एशिया के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट — तोरवा स्थित अरपा नदी तट — पर सैकड़ों श्रद्धालु और स्वयंसेवक श्रमदान के लिए एकत्र हुए।

सुबह 7 बजे से घाट की साफ-सफाई का कार्य प्रवीण झा के नेतृत्व में शुरू हुआ। भक्तों ने नदी के जल और घाट परिसर की सफाई की। इस दौरान श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला।

बिलासपुर का तोरवा छठ घाट लगभग 7.5 एकड़ में फैला हुआ है, जो इसे एशिया का सबसे बड़ा स्थाई छठ घाट बनाता है। समिति के सदस्य और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूरे घाट पर झाड़ू लगाकर सफाई अभियान को पूर्ण किया।

छठ पूजा समिति के प्रमुख सदस्य प्रवीण झा ने बताया कि शनिवार की महाआरती में लगभग 5000 श्रद्धालु शामिल हुए। इस वर्ष महापर्व का 25वां वर्ष (रजत जयंती वर्ष) है, जिसे विशेष रूप से भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। इस आयोजन में समिति के सदस्य — डॉ. धर्मेंद्र दास, अभय नारायण राय, सुधीर झा, बी.एन. ओझा — सहित अनेक स्वयंसेवक सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

प्रवीण झा ने बताया कि इस वर्ष लगभग 60 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था हेतु 500 से अधिक पुलिसकर्मी और वॉलिंटियर्स संयुक्त रूप से तैनात रहेंगे।

 खरना पूजा के साथ 36 घंटे का व्रत आज से होगा प्रारंभ

लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गया है। रविवार को खरना का विशेष दिन है। व्रतियों ने स्नान के बाद कद्दू, अरवा चावल और चना दाल से बना प्रसाद ग्रहण कर चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लिया।

रविवार की शाम व्रती मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी के जलावन से अरवा चावल और गुड़ की खीर तैयार करेंगे। यह प्रसाद सूर्य देव को अर्पित करने के बाद ग्रहण किया जाएगा।

 कठोर नियमों वाला है यह व्रत

छठ पर्व का दूसरा दिन, खरना, विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन से निर्जला व्रत प्रारंभ होता है। व्रती दिनभर मन, विचार और शरीर की शुद्धता का पालन करते हैं।
संध्या के समय पूजा कर गुड़ की खीर — दूध, चावल और गुड़ के मिश्रण से बनी — तथा गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करते हैं। इसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं और यहीं से 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो जाता है।

 पूजन सामग्री खरीदने बाजारों में उमड़ी भीड़

छठ पूजा समिति के सक्रिय सदस्य रौशन सिंह ने बताया कि यह पर्व शुद्धता, पवित्रता और संतान प्राप्ति, निरोगी काया एवं सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है।
पूजा की तैयारियों में बुधवारी, शनिचरी, बृहस्पति, मंगला, सरकंडा, राजकिशोर नगर और तिफरा के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है।

रविवार को शाम के समय घरों में हवन व पूजा-पाठ होगा। खरना का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से तैयार किया जाएगा — अरवा चावल, दूध और गुड़ से बनी खीर व रोटी। प्रसाद को सूर्य देव को भोग लगाकर ग्रहण किया जाएगा।
मुख्य पर्व सोमवार को मनाया जाएगा, जब श्रद्धालु तोरवा छठ घाट पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे।

粒 श्रमदान में उपस्थित रहे प्रमुख सदस्य

प्रवीण झा, विजय ओझा, अभय नारायण राय, धर्मेंद्र दास, राम प्रताप सिंह, सुधीर झा, रौशन सिंह, दिलीप चौधरी, पंकज सिंह, लव ओझा, धनंजय झा, ए.के. कंठ, राम सखा चौधरी, हरिशंकर कुशवाहा, चंद्र किशोर प्रसाद, मुन्ना सिंह, रिंकू दुबे, प्रशांत सिंह, राजीव गिरी, धीरज झा, अशोक झा, शौलेंद्र सिंह, निर्भय चौधरी, रवींद्र कुशवाहा, हेमंत झा, अमरनाथ तिवारी, विनोद सिंहा, बसंत ओझा, संतोष राय, सन्नी गिरी, कुबेर डँसेना, अमन कुमार, सुभाष यादव, रविरंजन ओझा, अरुण सिंह, विद्यानंद दुबे, लालू ओझा, विनोद पांडे, श्याम बाबू, अभिषेक ओझा, संतोष ओझा, आशुतोष पांडे एवं अन्य भक्तगण उपस्थित रहे।

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